नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ
पृष्ठ 277, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 277
हन्यादुपायैर्निपुणैर्गृहीतान् तथैव शास्तावन्निगृह्य पापान् ॥ 61 ॥ राजा को विवेक से कार्य लेते हुए प्रयोगों और अनुभवों से सुपरीक्षित एवं व्यावहारिक दृष्टि से उपयोगी सिद्ध दण्डात्मक उपायों से पापियों तथा अपराधियों को पकड़कर व बन्धन में डालकर रखना चाहिए तथा देश में वार्ता- कृषि, वाणिज्य और पशुपालन--के विकास के अवसर जुटाकर प्रजा को समृद्ध बनाना चाहिए। देश की समृद्धि एवं सम्पन्नता में सहायक सिद्ध होने वाली दण्ड नीति का प्रयोक्ता राजा ही प्रजा का अनुराग तथा सम्मान, यश एवं प्रतिष्ठा पाने में सफल होता है। ॥ नारदस्मृति समाप्त ॥ नारदस्मृति / 275