निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
साहिब बन्दगी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)
पृष्ठ 31, कुल 112 में से
संदर्भ में पढ़ें| निराले सद्गुरु | 31 |
|---|
बचपन से ही परिश्रमी रहे आप
आप सात भाई थे। आपके पिताजी कई साल खटिया पर पड़े रहे। 9 जीवों का पेट पालना था, कैसे होता ! इतने में बड़े भाई की शादी हुई। बीबी आई तो उसने कहा कि हम इतने लोगों को नहीं पाल सकते। वो अलग हो गये। आपकी उम्र तब 10 साल की थी। आपने इतनी छोटी उम्र में ही कड़ी मेहनत करके पूरे परिवार को पालने में सहयोग किया। आपके पिताजी बहुत बड़े विद्वान थे। उन्होंने अपनी बहन की लड़कियों की शादी करवाई थी। पर अब घर की हालत ठीक नहीं थी। लड़कियों की शादी अच्छे घर में हुई थी। एक बार वो आईं और आपको 500 रूपये के नोट दे गयी। जब पिता जी को पता चला तो कहा कि तूने क्यों लिए पैसे? तब उन्होंने आपको उसी समय भेजा, कहा कि अभी वे रास्ते में ही होंगी, जा वापिस कर आ। आप तभी गये। यानी आपके पिता जी हिम्मत हारने वालों में से नहीं थे। ...तो तब 10 साल की उम्र से आपने जो कड़ी मेहनत शुरू की, उसके बाद आपने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आराम क्या होता है, इसका आपको पता न चला। 7 साल आपने परिवार की कड़ी मेहनत करके सेवा की; फिर 17 साल की उम्र में आपने फौज की नौकरी की। तब गुरु के सान्निध्य में आ चुके थे। फिर गुरु की जमकर सेवा की। गुरु जी कहते थे कि तू निराली चीज़ है।
भूत भी भाग जायेगा
दिन में 21 घण्टे आप काम करते हैं और इन 21 घण्टों में जितना काम आप करते हैं, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। किसी महात्मा की बात तो छोड़ो, कोई भी इंसान चाहे बहुत बड़ा धावक हो या पहलवान या अन्य मेहनती ही क्यों न होगा, नहीं कर पायेगा। यदि कोई भूत आपके साथ काम करने लगे तो वो भी भाग जायेगा, कहेगा कि यह