भारतकोश
निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

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निराले सद्गुरु 53

रूप में किसी इंसान को समझा नहीं पाते हैं, कोई भी आपकी बात नहीं मानता है। एक अन्य भी तरीका है, पर उससे सब जीव आपमें समा जायेंगे, इसलिए आप हमेशा एक पर्दे से जीव को समझाते हैं, ताकि काल निरंजन को दिये हुए शब्द को काटे बिना आप सब जीवों को एक-साथ न ले जाकर युक्ति-युक्ति रूप से थोड़े-थोड़े जीवों को अमर-लोक ले जाएँ। ... तो आप युक्ति-युक्ति वाला तरीका ही अपनाते हैं। पर यह तरीका एक इंसानी रूप में ही ठीक रहता है। इंसानी रूप में आकर जब सद्गुरु समझाते हैं तो जीव समझ भी जाते हैं। जीवों को युक्ति-युक्ति रूप से समझाने का जो काम सत्य पुरुष बिना शरीर के नहीं कर पाते हैं, वो काम संतों के शरीर के माध्यम से ही हो पाता है, इसलिए आप संतों को परम-पुरुष से बड़ा दर्जा देते हैं। हमारे साहिब जी इस शरीर से नितान्त ही परे रहते हैं। आप तो केवल शरीर में दिखाई देते हैं, पर वास्तव में आप अपने स्वरूप में ही हर समय समाए रहते हैं। यह बड़ी ही अटपटी बात है, जो कहने में नहीं आ रही है।

आपका नाम सबसे निराला है

आप आमतौर पर एक बात कहते हैं कि जो वस्तु मेरे पास है, वो किसी के पास नहीं है। वो वस्तु नाम ही है। सच है, जो नाम आपके पास है, वो किसी के पास नहीं है।

सन् 2002 में जब मुम्बई में शांति सम्मेलन हुआ तो देश के चुनिन्दा लोगों को बुलाया गया। दलाई लामा जैसे धार्मिक अगुआ भी उसमें शामिल थे। इसी तरह सिक्खों के, मुसलमानों के, ईसाइयों के पादरी आदि भी थे और विभिन्न पंथों, मत-मतान्तरों के अगुआ लोगों को निमंत्रण दिया गया था। आपको भी उसमें बुलाय गया। आपने भी सोचा कि चलो देखते हैं।

वहाँ बोलने को अपने-2 विचार प्रकट करने का विषय था कि

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