भारतकोश
निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

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निराले सद्गुरु <span style="float: right;">91</span>

नहीं करते। जब आश्रम में भीड़ होती है, तब वे सामने नहीं आते हैं, पर जब सभी अपने-अपने घरों को लौट जाते हैं तो वे सामने आ जाते हैं। कभी-कभी वे आपको बंदगी करने आते हैं और आपकी इच्छा से वे आपको बंदगी करके फिर अपने-अपने स्थान को लौट जाते हैं।

अखनूर आश्रम की नींव रखनी थी। पहली बार आपने वहाँ चरण रखे तो एक साँप सामने की ओर से, दो साँप एक सॉइड से और दो साँप दूसरी सॉइड से आपकी तरफ बढ़े और पास आकर आपके चरणों में सिर टिका दिया; बंदगी की और चले गये। आज बहुत समय हो गया है। वे बहुत बड़े हो गये हैं। आज भी वे चुपके से कभी-कभी आपको बंदगी करने आते हैं और प्रेम सहित आपको बंदगी करके लौट जाते हैं।

यह एक रहस्यमय सत्य है, पर दुनिया इन बातों पर आसानी से विश्वास नहीं कर पाती है।

पशु पक्षी नर नाग सभी जीव,
करते हैं साहिब आपको,
बारंबार परनाम।
कर बंदगी वे बारंबार,
सुरति के अमृत को पीकर,
पाते हैं विश्राम।
जानत वे मानुष आप नाहीं,
देखते सबमें आत्म का रूप,
नहीं चाम से काम।
हो साहिब आप अमर लोक के,
आए हो लेने
आत्म को निज धाम॥