भारतकोश
निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary

महर्षि यास्क मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 1282 में से

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पृष्ठ 307

१४२ २ अ० ७ पा० ६ खं० । ऊपर दिये हुए खण्डसूत्रके अनुसार इस द्वितीय अध्यायमें आरम्भसे अन्त तक निरुक्तके पाठमें खण्ड आये हैं। उन्हींके स्मरणार्थ यह खण्डसूत्र है। जहां आदर्श पुस्तकमें एक खण्डमें दो खण्ड या अन्यथा किया गया है, वहां मूल खण्ड प्रतीकके साथ द्वयर्धचन्द्र-( ) चिन्हके भीतर नवीन पाठ-विभाग दे दिया गया है। पादोंका आरम्भ और खण्डोंकी संख्या भी यथास्थान उक्त चिन्हमें दी गई है। इति हिन्दीनिरुक्ते पूर्वषट्के द्वितीयोऽध्यायः समाप्तः ॥ २, ७ ॥

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