भारतकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

पृष्ठ 119, कुल 220 में से

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जनपदसमुद्देशः १०३ अपने स्वामी का उत्कर्ष करने के कारण शत्रुओं के हृदय विदीर्ण करने के कारण (राज्य को) दरत् कहते हैं। पहाड़ी इलाकों को दरत् कहा जा सकता है। दरत् शब्द पहाड़ का वाचक है और दरदाः कश्मीर के सीमान्त वर्त्ती प्रदेश को कहते हैं। निगम का अर्थ— आत्मसमृद्ध्या स्वामिनं सर्वव्यसनेभ्यो निगमयति निर्गमयतीति निगमः ॥ ७ ॥ जो अपनी समृद्धि के कारण स्वामी को सब प्रकार की आपत्तियों से निर्गम करा दे निकाल दे—बचा दे वह ही निगम है। जनपद के गुण— अन्योऽन्यरक्षकः, खन्याकरद्रव्यनागधनवान्, नातिवृद्धनातिहीन- ग्रामः, बहुसारविचित्रधान्यहिरण्यपण्योत्पत्तिः। अदेवमातृकः, पशुमनुष्य- हितः, श्रेणिशूद्रकर्षकप्राय इति जनपदस्य गुणाः ॥ ८ ॥ जनपद के निम्नलिखित गुण हैं वह एक दूसरे का रक्षक हो अर्थात् जन- पद से राजा की रक्षा होती हो और राजा से जनपद की रक्षा होती हो, वहाँ तरह-तरह के खनिज पदार्थ गन्धक, अभ्रक, नमक आदि और आकर से प्राप्त होने वाली धातुएं सोना, चांदी, तांबा आदि सम्पत्ति हो और उसके जंगलों में हाथी हों, उसके गांव न बहुत छोटे हों और न बहुत बड़े ही हों, जिसमें बहुमूल्य और विचित्र-विचित्र प्रकार के धान्य, सुवर्ण तथा विक्रय की बाजारू वस्तुएं सुलभ होती हों, जहां की खेती-बाड़ी केवल देवमातृक न हो अर्थात् नहर नदी आदि हों न कि मेघ ही पानी बरसावे तो खेती हो, पशुओं और मनुष्यों के लिये समान रूप से हितकर हो वहां श्रेणी अर्थात् बढ़ई, जुलाहे, नाई, धोबी, मकान बनाने वाले कारीगर और चर्मकार आदि हों, इन सब गुणों से जनपद का गौरव होता है। देश के लिये दोष— विषतृणोदकोषरपाषाणकण्टकगिरिगर्त्तगह्वरप्रायभूमिरभूरिवर्षाजीवनो व्याललुब्धकम्लेच्छबहुलं, स्वल्पसस्योत्पत्तिः, तरुफलाधार इति देश- दोषाः ॥ ९ ॥ घास फूस और जल का विषाक्त होना, अधिकांश भूभाग का ऊसर, पथ- रीला, कंटीला अर्थात् कांटेदार झाड़ियों से युक्त होना तथा छोटे-बड़े गड्डों से युक्त होना, बहुत वर्षा होने पर जीवन का निर्भर होना अर्थात् केवल धान की खेती वाला होना सर्प बहेलिया और म्लेच्छों की अधिकता, थोड़ा अन्न

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