भारतकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

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२०० नीतिवाक्यामृतम् श्रीमन्महेन्द्रदेवभट्टारकानुजेन स्याद्वादाचलसिंह, तार्किकचक्रवादीभ- पञ्चानन, वाक्कल्लोलपयोनिधि, केकिकुलराजकुञ्जरप्रभृतिप्रशस्ति-प्रस्तावा- लङ्कारेण षण्णवतिप्रकरण-युक्तिचिन्तामणि (त्रिवर्गे) महेन्द्रमातलि- संजल्प-यशोधरमहाराजचरित-महाशास्त्र-वेधसा श्रीमत्सोमदेवसूरिणा विरचितं नीतिवाक्यामृतं नाम राजनीतिशास्त्रं समाप्तम्। श्रीः शुभं भूयात्। नीतिवाक्यामृतं सम्पूर्णम्। समस्त तार्किकचक्रचूडामणियों से वन्दनीय, पचपन महान् वादियों के विजयी, उत्कृष्टतपश्चर्या के सागर भगवान् नेमिदेव के प्रियशिष्य, वादीन्द्र- कालानल-श्रीमन् भट्टारक महेन्द्रदेव के छोटे भाई-स्याद्वाद-अचलसिंह, तार्किकचक्रवादीभपञ्चानन, वाक्कल्लोलपयोनिधि-केकिकुलराजकुञ्जर इत्यादि प्रशस्तियों से अलङ्कृत षण्णवतिप्रकरण, युक्ति-चिन्तामणि, त्रिवर्ग-महेन्द्र- मातलिसंजल्प, यशोधरमहाराजचरित के रचयिता महाशास्त्रों के विधाता श्रीमान् सोमदेवसूरि द्वारा विरचित नीतिवाक्यामृत नाम का राजनीतिशास्त्र समाप्त हुआ। भगवती श्री कल्याणकारिणी हो। नीतिवाक्यामृत समाप्त।