नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary
आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविचारसमुद्देशः ७६ किसी काम को थोड़ा सा करने के बाद उस पूरे काम की रूपरेखा को बुद्धि- बल से ज्ञान कर लेना निश्चय कर लेना अनुमान है । सम्भावितैकदेशो नियुक्तं विद्यात् ॥ १० ॥ किसी कार्य का एक अंश पूरा कर लेने पर पूर्ण कार्य का निश्चय कर ले । अर्थात् किसी व्यक्ति ने यदि किसी काम के प्रारंभिक अंश को सफलता के साथ कर लिया तो समझना चाहिए कि वह पूरा काम सफलता के साथ कर लेगा । होनहार राजकुमार के लक्षण— आकारः शौर्यं प्रज्ञा-सम्पत्तिरायतिर्विनयश्च राजपुत्राणां भाविनो राज्यस्य लिङ्गानि ॥ ११ ॥ शारीरिक सुन्दर आकार, शूरता, बुद्धिबल, प्रभाव, और विनय ये सब गुण राजकुमारों के भावी राज्य-शासन के चिह्न हैं । अर्थात् उक्त गुणों को देखकर यह अनुमान कर लिया जाता है या किया जा सकता है । प्राणियों के भविष्य की पहिचान— प्रकृतेर्विकृतिदर्शनं हि प्राणिनां भविष्यतोः शुभाशुभयोर्लिङ्गम् ॥१२॥ स्वभाव की विकृति ही प्राणियों के भावी शुभाशुभ का चिह्न हैं । अर्थात् किसी व्यक्ति के स्वभाव में जैसा कुछ भला-बुरा परिवर्तन समय-समय पर दिखाई पड़े वैसा ही उसका भविष्य जीवन समझे । एक कार्य में सफल व्यक्ति को अन्य कार्य में सफलता की संभावना— एकस्मिन् कर्मणि दृष्टबुद्धिपुरुषकारः कथं नाम न कर्मान्तरे समर्थः ॥१३॥ किसी एक काम में जो अपना बुद्धि और पौरुष प्रदर्शित कर चुका है वह दूसरे काम में क्यों नहीं समर्थ होगा ? आगम का लक्षण— आप्तपुरुषोपदेश आगमः ॥ १४ ॥ आप्त पुरुषों के उपदेश को आगम कहते हैं । आप्त का लक्षण— यथानुभूतामितश्रुतार्थाऽविसंवादिवचनः पुमानाप्तः ॥ १५ ॥ अनुभव, अनुमान और शास्त्रश्रुत अर्थ के अनुसार वचन बोलने वाला पुरुष आप्त है । युक्तिहीन वाक्य की व्यर्थता— सा वागुक्ताऽप्यनुक्तसमा, यत्र नास्ति सद्युक्तिः ॥ १६ ॥ जिसमें कोई अच्छी युक्ति न दी गई हो ऐसी बात कही हुई भी न कही जाने के समान है ।