भारतकोश
न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya

महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा

स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished410 पृष्ठ

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११४ वात्स्यायनभाष्यसहिते न्यायदर्शने [ २. अ० १. आ० अनुमानपरीक्षाप्रकरणम् [ ३८-४४ ] परीक्षितं प्रत्यक्षम् । अनुमानमिदानीं परीक्ष्यते— रोधोपघातसादृश्येभ्यो व्यभिचारादनुमानमप्रमाणम् ? ॥ ३८ ॥ अप्रमाणमिति—एकदाप्यर्थस्य न प्रतिपादकमिति । रोधादपि नदी पूर्णा गृह्यते, तदा च ‘उपरिष्टाद् वृष्टो देवः’ इति मिथ्यानुमानम् । नीडोपघातादपि पिपीलिकाण्डसञ्चारो भवति, तदा च ‘भविष्यति वृष्टिः’ इति मिथ्यानुमान- मिति । पुरुषोऽपि मयूरवाशितमनुकरोति, तदापि शब्दसादृश्यान्मिथ्यानुमानं भवति ? ॥ ३८ ॥ न; एकदेशत्राससादृश्येभ्योऽर्थान्तरभावात् ॥ ३९ ॥ नायमनुमानव्यभिचारः, अनुमाने तु खल्वयमनुमानाभिमानः । कथम् ? नाविशिष्टो लिङ्गं भवितुमर्हति । पूर्वोदकविशिष्टं खलु वर्षोदकं शीघ्रतरत्वं प्रत्यक्ष का परीक्षण किया जा चुका, अब अनुमान का परीक्षण किया जा रहा है— रोध, उपघात, तथा सादृश्य से अनुमान मिथ्या सिद्ध होने के कारण वह भी अप्रमाण है ॥ ३८ ॥ पीछे जो आप अनुमान के तीन भेद कर आये, उनमें एक भी अर्थ का यथार्थप्रतिपादक नहीं है । जैसे शेषवदनुमान का उदाहरण है—नदी भरी हुई दिखायी देने से अनुमान होता है—‘ऊपर कहीं वर्षा हुई हैं’; परन्तु कहीं आगे अवरोध ( रुकावट ) होने पर भी तो नदी भरी हुई दिखायी दे सकती है, अतः भरी हुई नदी देख कर वृष्टि का अनुमान मिथ्यानुमान है; क्योंकि यहाँ पूर्णत्वहेतु व्यभिचारी है । इसी तरह पूर्ववदनुमान का उदाहरण—‘चींटी अण्डा उठाये ले जा रहीं हैं, अतः वृष्टि होगी’—भी मिथ्यानुमान है, क्योंकि यहाँ ‘चींटियों का अण्डे उठाना’ हेतु उनके विल ( शरणस्थल ) के नष्टभ्रष्ट होने से भी हो सकता है, अतः वह व्यभिचारी है । इसी प्रकार सामान्यतोदृष्टानुमान का उदाहरण—‘मोर बोल रहे हैं, अतः वर्षा होगी’ भी मिथ्यानुमान ही हैं; क्योंकि पुरुष भी परिहास या आजीविका के लिये मोर की वोली बोल लेते हैं, अतः यह ‘मोर की वोली’ हेतु यहाँ व्यभिचारी है ॥ ३८ ॥ नहीं; क्योंकि एकदेश, त्रास, सादृश्य हेतुओं से उन उदाहरणों में अर्थान्तर आ जाता है ॥ ३९ ॥ आपके द्वारा अनुमान के खण्डन में जो हेतु दिये हैं, उनसे अनुमान में व्यभिचार नहीं आता । ये उक्त उदाहरण सही ‘अनुमान’ नहीं; बल्कि अनुमान में अनुमानाभिमान हैं । कैसे ? सामान्य नदीवृद्धि विशेषण से अविशिष्ट होकर अनुमान में हेतु नहीं बनती, अपितु पहले के जल से विशिष्ट वर्षा का जल, प्रवाह का वेग, बहुत से झाग, फल, सूखे CC-0. Jangamwadi Math Collection. Digitized by eGangotri