भारतकोश
न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)

Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya

महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा

स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished410 पृष्ठ

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५० वात्स्यायनभाष्यसहिते न्यायदर्शने [ १. अ० १. आ० इति । उदाह्रियतेऽनेन धर्मयोः साध्यसाधनभाव इत्युदाहरणम् ॥ ३६ ॥ तद्विपर्ययाद्वा विपरीतम् ॥ ३७ ॥ दृष्टान्त उदाहरणमिति प्रकृतम् । साध्यवैधर्म्यादतद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणमिति । 'अनित्यः शब्दः, उत्पत्तिधर्मकत्वात्, अनुत्पत्तिधर्मकं नित्यमा- त्मादि' । सोऽयमात्मादिर्दृष्टान्तः साध्यवैधर्म्यादनुत्पत्तिधर्मकत्वादतद्धर्मभावी, योऽसौ साध्यस्य धर्मोऽनित्यत्वं स तस्मिन्न भवतीति । अत्रात्मादौ दृष्टान्त उत्पत्तिधर्मकत्वस्याभावादनित्यत्वं न भवतीति उपलभमानः शब्दे विपर्ययमु- मिनोति—'उत्पत्तिधर्मकत्वस्य भा वादनित्यः शब्दः' इति । साधर्म्योक्तस्य हेतोः साध्यसाधर्म्यात् तद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणम् । वैधर्म्योक्तस्य हेतोः साध्यवैधर्म्यादतद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणम् । पूर्वस्मिन् दृष्टान्ते यौ तौ धर्मौ साध्यसाधनभूतौ पश्यति, साध्येऽपि तयोः साध्यसाधन- भावमनुमिनोति । उत्तरस्मिन् दृष्टान्ते तयोर्धर्मयोरेकस्याभावादितरस्याभावं पश्यति, तयोरेकस्याभावादितरस्याभावं साध्येऽनुमिनोतीति । तदेतद्धेत्वाभासेषु भी अनित्य है, उत्पत्तिधर्मक होने से, स्थाल्यादि की तरह।' दो धर्मों का साध्य-साधन- भाव इससे उदाहृत होता है, अतः इसे 'उदाहरण' कहते हैं ॥ ३६ ॥ साध्य के असादृश्य से अतद्धर्मभावी दृष्टान्त भी 'उदाहरण' कहलाता है ॥ ३७ ॥ 'दृष्टान्त उदाहरण होता है'—यह प्रसङ्ग चल रहा है। यहाँ सूत्रकार कहते हैं— साध्य की असमानता से साध्य के धर्म से असम्बद्ध दृष्टान्त भी 'उदाहरण' कहलाता है। जैसे—'शब्द अनित्य है, उत्पत्तिधर्मक होने से, जो उत्पत्तिधर्मा नहीं होता वह नित्य होता है, यथा—आत्मा आदि।' यहाँ 'आत्मा आदि' दृष्टान्त है, साध्य की असमानता से अनुत्पत्तिधर्मा होने के कारण अतद्धर्मभावी अनित्यस्वरूप साध्यधर्म उसमें ( आत्मा में ) नहीं रहता। यहाँ प्रमाता 'आत्मा आदि दृष्टान्त में उत्पत्तिधर्मत्व न रहने से अनित्यत्व नहीं बनता' ऐसा अनुभव करता हुआ, शब्द में विपरीत अनुमान करता है— 'उत्पत्तिधर्मक होने से शब्द अनित्य हैं'। साधर्म्योक्त हेतु का साध्यसमानता से युक्त तद्धर्मभावी दृष्टान्त 'उदाहरण' कहलाता है। वैधर्म्योक्तहेतु का साध्य की असमानता से अतद्धर्मभावी दृष्टान्त भी 'उदाहरण' कहलाता है। प्रथमोक्त दृष्टान्त में प्रमाता जिन दो धर्मों को साध्यसाधनभावापन्न देखता है, साध्य में भी उन दोनों के साध्यसाधनभाव का अनुमान कर लेता है। उत्तर दृष्टान्त में उन दोनों धर्मों में से एक के न रहने पर इतर का अभाव देखता है तो वह साध्य में भी उनमें से एक के अभाव का अनुमान कर लेता है। यह बात हेत्वाभासों में CC-0. Jangamwadi Math Collection. Digitized by eGangotri