अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपरम पूज्य गुरुदेव का अमृत चिन्तन सदा स्वस्थ और सुखी रहें
जबसे भारतीय खान-पान रहन सहन अस्त व्यस्त हुआ तभी से इस देश का जन बल घट गया; हम भूलते जा रहे हैं कि हम जो कुछ भी खाएं सोच समझकर खाएं तथा उतना ही? जो शरीर के लिए आवश्यक
आहारशास्त्र के ज्ञाता मनुष्य और प्राणिमात्रकी प्रकृति को दो या तीन उप-- भागों वात, पित्त तथा कफ में विभाजित कर सकते हैं। शरीर का जब तक वायु, पित्त तथा कफ पर आधिपत्य रहता है; स्वास्थ्य अक्षुण्ण रहता है। प्रकृति की रचना विकृत होने पर उपर्युक्त इन तीनों अथवा तीनों में से किसी एक का प्रकोप बढ़ जाता है। तब मनुष्य अपनी रोग-प्रतिरोधी क्षमता खो बैठता है। आज भारतीयों की प्रकृति में जो विकार आ गए हैं उन पर दृष्टिपात करें तो ज्ञात होगा कि अधिकांश वात जन्य रोगों से पीड़ित हैं। इसका एक कारण यह भी है कि पेट में गैस बनना साधारण बात है। हमारे देश के आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ गई है, जो कि वात विकारों को आमन्त्रित कर रही है। आलू का प्रचलन इतना बढ़ गया है कि शाकाहारी भोजन आलू के बिना अधूरा समझा जाता है; यह कार्बोहाइड्रेट उत्पन्न करने के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य नहीं करता। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता, अधिक परिश्रम करने वालों के लिए यह कुछ उपयोगी है पर जो कम शारीरिक श्रम करते हैं वे अपनी पाचन प्रणाली को बिगाड़ ही लेते हैं। आलू को तलकर या घी-मसालों के साथ खाना तो और भी हानिकारक है; साथ ही बासी व तला आलू तो और भी नुकसान करता है। आलू के छिलके उतार कर प्रयोग करना, तो उसके गुणों को नष्ट कर देना है। आज भोजन में से हरी-सब्जी कम हो गई है। आलू अधिक बढ़ गया है। क्या हम इन कारणों पर विचार करते हैं? भोजन करते समय विचार करना चाहिए कि क्या, कितना और कैसे खाया जाए। पर क्या हम इस ओर ध्यान देते हैं? भोजन करते समय क्या, कब और कितना खाया जाए इस ओर ध्यान देना चाहिए, नहीं तो इसका उल्टा प्रभाव पड़ेगा। यदि भोजन रुचिपूर्ण न होगा तो वह पचेगा कैसे? भोजन के पाचन में लार का प्रमुख हाथ रहता है। लार के बिना भोजन पच नहीं सकता। भोजन को खूब चबाकर खाना चाहिए। चबाकर भोजन को खाने से लार पूर्ण रूप से उसमें मिल जाती है। भोजन जल्दी-जल्दी नहीं खाना चाहिए... । भोजन "धीरे-धीरे चबाकर खाया जाए" यह भी ध्यान रहे कि खूब भूख लगने पर ही खाया जाए। बिना भूख के खाना नहीं खाना चाहिए... ।