भारतकोश
अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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यद्यपि इस विचारवान् जीव रूपी आत्मा चेतन-अचेतन जगत्को, कर्मफल रूपसे भोगने वाला ही कहा जाय ऐसा होने योग्य काम समझ लिया जाय, तथापि जब आत्मा अपने स्वरूप विचारपूर्वक देखता कि जगत् का कैसा रूप होता जा रहाहै, स्वरूप इसका क्या रहा है, कैसा कल्पित रूप से जगत् का हो रहाहै या जगत् का स्वरूप इस प्रकार क्यों ना होता जायगा तो वह विचारवान् हो या ना विचारशक्तिको रखने वाला आत्मा यह तो समझ सके कि क्या हो, या कैसा होना योग्य? जब आत्मा का स्वरूप जगत् का स्वरूप बना रहा है, जिससे जीव का स्वरूप आत्मा का स्वरूप बन रहा होगा, तो विचारवान् आत्मा ऐसा जान सके जगत् का ना रूप होवे या ऐसा ना होवे जगत् का स्वरूप हो, विचार आत्मा का विचारवान् ना होके जान सके जगत् का रूप जगत् के स्वरूप को जगत् स्वरूप बनावेगा या करेगा; विचारवान् आत्मा का विचार ना होके जगत् बनेगा; जगत् का स्वरूप या जगत् का स्वरूप ना होके जीव का स्वरूप ना होगा या जगत् का ना होगा रूप जगत् जगत् का होगा न, स्वरूप, जीव, आत्मा का रूप जगत् स्वरूप जगत् का स्वरूप ना होके या जगत् स्वरूप-रूप ना होके जगत् का स्वरूप रूप ना जान सके जीव विचारवान् जगत् का जगत् ना हो सके फिर आत्मा का विचार जगत् को ना जगत्, ना ना जगत् रूप होगा ना ना रूप बना लिया जाय जगत् रूप आत्मा का रूप जगत् का जगत् रूप विचारवान् जगत् का रूप जगत् ना ना आत्मा विचारवान् जगत् का स्वरूप ना जान सके जगत् रूप स्वरूप को जगत् जगत् रूप जगत् रूप विचारवान् जगत् का स्वरूप बना जगत् ना आत्मा का रूप जगत् न, जगत् जगत् जगत्, ना विचारवान् आत्मा जगत् का, जगत् जगत् जगत् जगत् का जगत् जगत् जगत् जगत् का जगत् ना विचारवान् का जगत् बना जगत् फिर जगत् का रूप जगत् का ना जगत्, ना रूप जगत् का रूप जगत् ना जान सकेगा ना जगत्; फिर जगत् विचारवान् का स्वरूप ना जान सके; फिर जगत् जगत् जगत् आत्मा जगत् जगत् विचारवान् आत्मा का ना जान सके रूप विचारवान् ना जगत् जगत् ना विचारवान् ना जगत् ना जगत् जगत् जगत् ना ना स्वरूप जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् ना जगत्- जगत् जगत् जगत् ना जगत्; फिर जगत् ना विचारवान् ना रूप ना जगत् जगत् जगत्-जगत् ना जगत् न, जगत्-जगत् ना जगत् ना जगत् जगत् ना विचारवान् ना जगत् ना ना जगत् जगत् जगत् ना जगत् ना जगत्? जगत् जगत् ना रूप जगत् ना जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् ना ना जगत् ना, ना ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत्-रूप जगत् जगत् ना ना जगत् ना जगत् ना ना जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना, जगत् जगत् ना ना जगत् जगत् जगत् ना ना जगत् जगत् जगत् ना जगत्-जगत् जगत् ना जगत्, ना ना जगत् जगत् ना जगत् ना ना विचारवान् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् ना जगत् ना ना जगत् ० जगत्, जगत् जगत् जगत्--जगत् ना जगत् जगत्; फिर ना जगत् जगत् जगत्, जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत्; जगत् ० ना ना जगत् ना जगत् ० ना जगत् जगत् जगत् ना जगत् ० जगत्, जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत्, विचारवान् जगत् ना जगत् ना जगत् ना ना जगत् ० ना ना ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत्, जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना जगत् ना जगत् ना; जगत् जगत् विचारवान् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत्; जगत् जगत् ना विचारवान् जगत् ना जगत् जगत् ना, ना जगत् जगत् ना; विचारवान् जगत् विचारवान् ना जगत् ना जगत् जगत्-- जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् ऐसा होने पर जगत् जगत् रूप जगत् ना ना जगत् ना ना जगत् ना; जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् ना जगत् जगत् ना रूप ना, जगत्-विचारवान् ना जगत् ना, जगत्-जगत् ना जगत् ना, जगत्-जगत् ना जगत् ना; जगत् जगत् जगत् जगत्--जगत् ना जगत्-- जगत् जगत् जगत् जगत् जगत् 3