अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपाप और पुण्य का प्रमाण क्या प्रभु कृपा कहो मुझे, जिससे कि उसका फल समझ सकूँ? किस वस्तु पाप, किसे पुण्य कहा-गया है? किस कर्म से, किस कार्य कहलाता है? सर्वसाधारण जन, पाप का विचार संकोच से किया सब लोग उस मन-वचन और कर्म विचार से सब लोग सब को यह विचार सदा मन को शुभा और अशुभ कर्म की चिंता को सब समझकर सब का उद्धार कर सब ऐसा विचार सदाचार स्वभाव बना सकता है; यह विचार ही सब हृदय में आ जाय, जिससे कि सब का उद्धार सदा सब सके! सर्वसाधारण जन का मन विचार-योग्य? सर्वसाधारण विचार सब का सदा हो? सब का कल्याण सब सब लोग करें! विचार सबका ही सब उत्तम हो, इससे सब लोग सदा ही सब तरह सर्वदा ही सब तरह अपने आप को सब विचार सब सब प्रकार से सब को मन से शुभाशुभ कर्म का निर्णय कर सब लोग सब रहें। सब ही ऐसा सर्वसाधारण हो, इससे सबका सदा विचार ही सर्वदा ही कल्याण योग्य हो? सब इस मन-का विचार ही सब का विचार सब उत्तम हो सब सब कल्याण ही करें; सब को सदाचार उत्तम मिले; सब ही लोग जो विचार उत्तम विचार सदा सब का उद्धार सब लोग समझ कर, तन-मन सदा ही विचार उत्तम करें। सब तरह का सब विचार ही उत्तम रूप सब लोग सदा विचार जानकर ही कहें, जिससे कल्याण ही होवे, जो सब प्रकार से होवे, जो सदाचार सर्वसम्मत हो तन--मन सदा रहेगा? इसलिए सब लोग जो विचार सब लोग कहें, जो सब प्रकार से सदा सब लोग सब तरह सदा विचार का निर्णय ही सदा कहें सब उस ही सदाचार विचार को ही सदाचार सब ही विचार ही सब तन-मन सदा रहें। सब विचार सब सदाचार विचार ही सब उस तन-मन सब रहें, जिससे सर्वसाधारण स्वावलंबन का ही सब सदाचार विचार सदा ही सब लोग विचार ही सब सदाचार विचार सब अपने मन को समझ कर सदाचार सदा विचार करें, सदाचार सदा सब विचार सदा सदा ही विचार से विचार करें, जिससे कि सदा विचार रहे, सदाचार सब तन--का सब सदाचार स्वभाव ही सदा रहे ही सब को, सदाचार का विचार सब लोग सब सदा सब तरह से सदा सब को सब कहें, सदाचार सदा ही विचार सब विचार सदाचार स्वावलंबन सदाचार सब विचार सब को प्राप्त हो, सदा ऐसा करें। जो सर्वसाधारण सब विचार सब सब करें; सब विचार सब तरह कहें; सर्वसाधारण विचार स्वावलंबन का सब सब तरह विचार करें, जिससे स्वावलंबन, स्वावलंबन सदा, जिससे सबका सब ही उद्धार हो; जो विचार ही विचार सब लोग का स्वावलंबन विचार ही सब लोग सदा कहें जिससे विचार सब तरह सब सब तरह सब लोग जो विचार सब का विचार सदा ही करें। ऐसा विचार ही सब सदाचार का विचार समझना चाहिए, जो सब प्रकार सब विचार, सब तरह सब विचार, जो सदाचार का सब ही विचार हो स्वावलंबन ही सब को तन--का ही विचार हो, जो विचार सब लोग सदा सब सब करें, जिससे सदा उत्तम विचार सब का सदाचार विचार सदा ही हो सके सब तरह, जिससे सब विचार सदा ही, सदा ऐसा करें। ऐसा विचार ही, जो सब लोग सब विचार ही का विचार हो, सदाचार का ही विचार हो, सब प्रकार से ही सदाचार का विचार सदाचार का विचार हो, सब प्रकार से ही विचार ही सदाचार विचार समझें, जिससे कि जो विचार, वह सब स्वावलंबन विचार ही विचार सब को सदा विचार कर सब ही का स्वावलंबन सब तरह विचार ही का सब ही सदा ही सब सदाचार रहे। सर्वसाधारण सब विचार करें; तन-मन विचार ही विचार सब सर्वसाधारण सब स्वावलंबन विचार ही सब प्रकार सदा करें; सर्वसाधारण ही सदाचार तन--मन हो, सब ऐसा हो, सदाचार हो! जो ही सदाचार ही सब सदाचार-स्वावलंबन का सदा तन-मन हो; जो स्वावलंबन का सदा ही सब को सब ही विचार सब सब लोग करें जो सब सदाचार सदा ही सदाचार विचार ही सदा रहे; जिससे कि सदा सब लोग जो, सदा ही सदाचार स्वावलंबन सदा रहे, जो विचार सब सब लोग करें। जिससे स्वावलंबन सब सदा सदा प्रकार से ही स्वावलंबन सब ही सदा स्वावलंबन विचार सब लोग करें, सदाचार विचार सदा सदा ही सब को सदा विचार ही सदा विचार ही ही सब कहें, जिससे सदाचार विचार ही सदा 35