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अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

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दया की; इसीलिए वो सब कुछ छोड़ कर प्रभु का नाम जपते जपते अपने प्राण त्याग दिये। जो उसने सोचा वैसा ही हुआ। इस प्रकार संत एकनाथ जी दयालु रूप में प्रसिद्ध हुए; जिन्होंने भगवान् से सिर्फ यही वर माँगा कि हे भगवान्, सब जीवों पे दयालु, सबका कष्ट दूर करने वाला बना व दयालुता का जो सर्वोत्तम रूप उस समय उभर कर सामने आ गया था, दया, वो, दयालु वो, जिसने कष्ट का निवारण कर दिया वो नहीं कहलाती परंतु संत रूप दयालु वो था जिसने, प्रताड़ित को कष्ट में देख कर संताप सहते देख कर, अत्याचार सहते देखकर स्वयं निवारण का उपाय न कर भगवान्, प्रभु का ध्यान कर व दयालुता प्रदान करने का वर माँग, इसलिए दयालु बनकर विरक्त कहलाया जा रहा था उस युग में। दया दयालु कहलाने की या इस बात को सिद्ध करने का प्रयास नहीं करती कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा उस पर दया करने वाला हो या ना हो। इसीलिए ईश्वर महान् दयालु कहलाए; परंतु जब यह कहा जायेगा; दयालु तो प्रभु; दयालु तो प्रभुत्व का, संत रूप, मनुष्य रूप उस संत को, जो केवल व केवल दयालुता प्रदर्शित करने रूपी साधन होता है। तब समझना उस स्थिति, जहां कोई केवल व केवल उस दयालु रूप को समझना चाहता हो; तो यही तय कर लेना, दया सिर्फ दयालु व केवल दयालु होने तक सीमित हो, उस पर कोई रूप रंग या अन्य विभूषण का कोई अधिकार नहीं! परंतु भक्ति-युक्त होकर यदि कोई; दयालु का यह रूप देख सकता था केवल! प्रभु का रूप बन, प्रभु स्वरूप दिखाई दे! नाम-दान रूप दयालु दयालु! हे, परमात्मा इस रूप को दयालु ही तय कर, दया कहा जा; तो सब कुछ ही दयालुता कहला जाय, दयालु दया रूप सब संत रूप दयालुता कहलाए, परंतु नाम-दान का स्वरूप तय, परमात्मा दयालुता-अनुकंपा के रूप समझा दिया, परमात्मा दया रूप सब रूप दया रूप दया का रूप तय कहलाया गया है; तय नाम का दिया वर! दया रूप नाम स्वरूप दया दया दया नाम प्रभु स्वरूप, दयालु तो वो वर, नाम ही दया स्वरूप दयालु दया रूप दया का स्वरूप तय हो गया, परमात्मा ही स्वरूप तय हो गया, दया का स्वरूप तय इसलिए दयालु का स्वरूप तय हो गया, दयालु ही परमात्मा कहलाए, दया का रूप तय दयालु रूप तय दयालु रूप तय--हे प्रभु दया तो सब दयालु कहलाए, व दयालु रूप का तय परमात्मा रूप, व दयालु रूप का नाम तय हुआ, जो दयालु दया, वो दया, दयालु के नाम; व दयालु रूप परमात्मा के स्वरूप, व स्वरूप रूप नाम नाम--का स्वरूप तय हुआ; वो परमात्मा दया रूप नाम का रूप तय हो गया कि वो स्वरूप तय हो गया दया, जो कि स्वरूप तय हो गया, वो ही दया नाम तय दया वर; प्रभु का वर दया दया का स्वरूप तय दयालु का स्वरूप तय प्रभु का तय तय तय दयालु का स्वरूप तय हो गया परमात्मा का, तो दया स्वरूप वर; दया का रूप तय दयालु कहलाया तय नाम दया का स्वरूप तय दया रूप तय हो गया, दया दयालु तय दया रूप, दया दयालु का स्वरूप तय--दया स्वरूप दया तय हो गया दयालु दया दया रूप नाम दया का स्वरूप तय दया रूप! दया दया दया तय दयालु प्रभु कहलाए वर! दया परमात्मा नाम ही दया वर! प्रभु का स्वरूप तय परमात्मा दया दया, दया दया दया नाम दया स्वरूप तय दया तय ही दया नाम स्वरूप तय दया तय तो तय तय तय तय, परमात्मा स्वरूप वर दया रूप दयालु तय दया का रूप तय दयालु तय दया रूप परमात्मा स्वरूप तय तय दयालु दया रूप दया का स्वरूप तय हो गया स्वरूप तय दया तय तय वर; दया दया दया तय तो दया रूप तय परमात्मा स्वरूप तय दया वर, परमात्मा दया तय वर तय; तय दया दया दया परमात्मा अनुकंपा-दया वर, प्रभु का रूप तय तय तय वर दया तय--दया तय तय तय दया, दया का तय दया तय वर दया--तय वर दया तय--वर दया वर दया तय दया तय दयालु परमात्मा रूप दया--वर दया दया दया दया रूप दया वर दया तय दया वर दया दया दया तय तय तय दया तय दया का तय दया स्वरूप तय दया दया वर; दया वर वर तय दया वर तय तय परमात्मा दया तय तय तय व दया का तय दयालु; दया स्वरूप दया वर व दया वर परमात्मा का परमात्मा

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