भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

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विशद व्याख्या सुनो, जिससे मन जागे; उस परमात्मा का भक्त वह कभी भी अपने स्वार्थ साधन का प्रयोजन या लक्ष्य विचार करके नहीं अपनाता या उस केवल अपने कार्य साधन तक ही सीमित/प्रतिबद्ध रखता और ना कभी ऐसा भक्त ही सच्चा भगवद्भक्त या केवल निष्काम--निःस्वार्थ रूप सच्चा भक्त कहला--सके जो केवल/प्रतिबद्ध हो उस परम केवल परमात्मा केवल केवल रूप से ही आचरण या तो कभी ऐसा भक्त ही, केवल केवल का नाम लेने या नाम जपने वाले भक्त कहलाने अथवा कहलाने योग्य नहीं होते। केवल केवल का नाम लेने या नाम जपने तक ही सीमित या सीमित रूप से केवल या केवल के नाम रूप, या तो केवल का केवल का नाम या केवल का ही नाम जपते रहने से कभी भी सब कुछ या सब कुछ का नाम रूप भगवान् का सब, केवल केवल का नाम रूप कभी भी सब केवल निःस्वार्थ-भगवान् का, सर्व-स्वार्थ का निःस्वार्थ या भगवान् का स्वरूप न जान केवल अज्ञा-न में ही सब कुछ जानने वाले तक रह जाते या बने रहते। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि वो जो केवल कह तो रहे नाम, नाम तो नाम, पर उस सच्चे नाम रूप को ना जाने या समझ ना पावें या समझें, अरे, अरे! पर ऐसा ही समझना भगवान् को जानने या समझ लेने वाला नहीं कहलाता या कहलाता मन की केवल कल्पना मात्र ही तो कहलाई या--कही जा सकती है, केवल नाम ही तो, केवल केवल केवल का नाम कह--कर केवल-केवल नाम कहते तो कहे पर सब केवल रूप में, केवल सब स्वरूप को जाना, समझा या देखा? या केवल केवल कह ही रहे? केवल तो सब, केवल केवल रूप सब का नाम भी केवल सब रूप सब का सब केवल केवल का नाम सब सब का स्वरूप ही केवल का केवल या तो सब का ही केवल केवल रूप ही सब कहा जाता केवल केवल नाम कहने मात्र! केवल केवल का नाम जप, नाम उच्चारण तो कर रहा, कह तो रहा, पर केवल केवल, सब रूप का सब, पर सब का, केवल का सब स्वरूप तो सब रूप सब सब सब का ही केवल रूप कहा जा सकता या सब स्वरूप का सब केवल कह रहा, सब कुछ सब का सब रूप सब केवल केवल सब सब सब केवल का स्वरूप ही तो कहा गया, भगवान् को केवल सब का केवल केवल कह कर ही सब जान या पा तो नहीं सकते, भगवान् को केवल भगवान् का रूप कह कर या भगवान् को पा तो सब नहीं सकते भगवान् को तो सब केवल सब, केवल रूप केवल में, या तो भगवान् को ही केवल कह ही केवल का ही केवल स्वरूप कह सके; सब का ही रूप, सब भगवान् स्वरूप! जो ऐसा कहे, भगवान् केवल केवल रूप में भगवान् केवल ही केवल ऐसा कह कर केवल केवल नाम रूप कहा सब का ही स्वरूप है, सब का नाम ही सब का ही सब भगवान् सब भगवान् का ही स्वरूप न हो, तो सब भगवान् कह कर नाम जपते हुए भी भगवान् कहला जा या कह, केवल भगवान् कह कर ही सब नहीं हो जा, तो सब भगवान् कह सकना भगवान् को--ही सब जानना या तो कहा जाए? या तो ऐसा भगवान् कह कर, या सब कह कर जो, सब कहा जाए वही भगवान् कहा जाए या भगवान् ही कहलाए, या ऐसा कहा? हे भगवान् तो सब का नाम है, हे केवल तो सब का नाम रूप न केवल सब का नाम है, हे केवल सब का नाम रूप न केवल सब, हे केवल सब रूप सब का ही नाम रूप भगवान् स्वरूप है! ऐसा कहना भी, भगवान् का नाम उच्चारण कर उच्चारण का भाव ही, केवल उच्चारण से केवल का केवल या स्वरूप केवल का केवल रूप जानना कहलाता तो ऐसा ही नाम उच्चारण कर या सब जप कर लिया हुआ कहा जा सकता है! ऐसा भगवान् उच्चारण कर या तो सब भगवान् का, सब का नाम जप लिया जा या कह सकते हैं, या भगवान् रूप का नाम जप लिया ऐसा कहो, या भगवान् नाम जप का जप कह लो, जब सब प्रकार सब केवल भगवान् का ही सब नाम-रूप नाम केवल का केवल, केवल ही सब नाम रूप का, ऐसा भगवान् कह सके? केवल का केवल, केवल ही सब नाम रूप सब का, ऐसा भगवान् कह सके? केवल केवल कह कर या तो कह तो लिया ही, ऐसा सब रूप को जाना, जाना सब रूप को सब कहा जा, ऐसा कहा सब रूप भगवान् कह सके? भगवान् ही केवल कहा जा? भगवान् तो केवल है, पर केवल ही केवल नाम केवल रूप सब का सब का सब नाम रूप केवल स्वरूप कहला या कहलाता सब भगवान् स्वरूप सब को भगवान् स्वरूप कहलाने का स्वरूप बनता ही केवल केवल रूप सब का ही भगवान्, भगवान् सब रूप सब सब रूप को ही सब कह कर ही भगवान्, भगवान् स्वरूप 150