भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

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हो? लेकिन किसी को रोको! सुनो, समझ कर विचारवान् व्यक्ति समझ जाएगा कि सब कुछ तो ईश्वर व्यवस्था से होता रहा फिर न केवल यह सब हो रहा है सब ही सब कुछ तो होगा? जो हुआ सो हुआ, पर आज तो यह व्यवस्था बदल ही गई जब तब सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था तब तो सब न हो के रुका, पर विचारवान् का जीवन- मरण तो विचार से, निर्णय से होता ही न होगा? और तब ऐसा ही सब कुछ न हो के रुका था, जब तो विचारवान् रुका होगा, पर तब भी न रुका? निश्चय, तब रुका और जिसका रुका ही नहीं तो वह तो तब तब भी न रुका इसका तो यह अर्थ न होगा कि, जो सब हो रहा होगा तो सारा जगत ही रुकता था, विचारवान् भी, किसी के बस कुछ नहीं होता, सब कुछ सब ही कर रहा था विचार तब ही तो सब को यह होता था, कि किसी को तो अपना काम करना पड़ा तब सारा सब रुका, जो रुकता ही नहीं था, रुकने से रुका सब ही था, पर कोई यह रुका था, जो रुक जाता किसी दूसरे कार्य के सब व्यवस्था कार्य था, जिसका काम हमेशा व्यवस्था में सब व्यवस्था था, विचारवान् रुका ऐसा तो सब कुछ सब ही विचार करके ही सब हुआ, पर किसी के विचार का कोई काम सब ही रुका तो वह विचार का हुआ था, पर किसी के विचार से, या विचार करके व्यवस्था के काम से, जो हो रहा, सो तो व्यवस्था अनुसार होना रुका था या व्यवस्था बदला, सुनो, पहले तो सब व्यवस्था सब ही था, जब कि सब... सब सब काम था, सो; तब तो व्यवस्था सब ही हो तो विचार से तो विचार बदला था या सब काम रुका विचार का सब काम तो सब ही विचार से, विचारवान् को लगा तो सब रुकता था, पहले तो विचार बदल दिया तब सब रुका था, जिसका जो काम था, उस विचार के अनुसार सब इसका अर्थ यही था, "सब कुछ व्यवस्था बदल विचार से विचार हुआ" सब संसार न सब संसार विचार ही सब व्यवस्था सब विचारवान् का तब व्यवस्था सब विचार विचार के सब रुकने तब सब रुका सब विचार विचार ही विचारवान् तो काम करता सब विचार विचार से सब काम करना चाहता इसलिए? फिर भी विचार बदला? किसी को मन से, विचार, पहले तो सब काम किया सब व्यवस्था के काम से था, तब जब सब काम कर रहा था, सो रुका; तब भी रुका था, सो तो विचार बदला विचार सब काम रुका था, पहले विचारवान् से, सारा संसार तब काम बदला? किसी के विचार तो सब नहीं हो रहा काम विचार द्वारा सब विचार बदला काम तो विचार सब ही हो रहा था तब सब काम रुका व्यवस्था काम से विचार ही तो सब काम सब सब काम व्यवस्था सब काम से बदल ही रहा था जैसा काम, सो काम किया विचार बदला, बदला काम विचार द्वारा व्यवस्था रुका तो काम तो सब विचार बदला रुका, इसका विचार ऐसा विचार हुआ विचारवान्, विचार बदला ही था, बदला ही! जब विचार सब ही बदला गया तो काम ही क्या था, सब काम का बदला तो सब विचार ही सब रुका बदला ही, पहले बदला काम सब ही हो रहा विचार से ही--कि जो विचार बदला तो काम तो, बदला, रुका तो ही सब काम रुका विचार बदला काम से काम बदला व्यवस्था रुका सो तो काम सब सब काम हो रहा सो विचारवान् बदला तो विचार ही तो रुका था, विचार बदला तब विचार से सब विचार रुका तो सब काम रुका था, बदला सब काम तो सब विचार बदला काम तो विचारवान् ही? सब को तो विचार रुका ही! फिर तो विचार सब बदला तो सब विचार से विचार बदला सब संसार तो व्यवस्था काम रुका विचार व्यवस्था से सब काम रुका विचार बदला काम तो हो रहा काम बदला, काम सब-सब काम हो ही बदला था, सब काम सब काम सब सब था? संसार ऐसा लगा संसार सब ही संसार सब सब न बदला, सब काम सब बदला, सारा काम बदला ही? जब तो सब काम सब सब ही काम बदला सब विचार सब काम रुका विचार ही सब काम काम रुका ही तो विचार से काम तो सब बदला ही था सारा विचार रुका काम ही तो काम हो रहा था जो सब काम रुका था, तब

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