एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकुण्डलीयाँ बनाओगे तो इस जगत का काम ही खतम हो जायगा अर्थात् तुम! जो कुछ सब कुछ करने वाले समस्त ही अपने को ही सर्वो-परि मान लोगे तो जगत उत्पत्तिकर्ता का तो काम बन्द ही हो जाना पड़ा। विचार के देखो, सृष्टि को पैदा करने वाले सब की ही कद्र को जानतेहुये काम करते चले गये वा हैं, सो सब को ही संसार में अपने मन से ही सब को सुख देने वाले साधन देकर नियत किया वा जन्म-मरण के फेरे सब पदार्थों अपने बनाये स्वरूप नियत किये वा सब शक्तियां दी शक्ति रूप साधन बना संसार की पालना की व्यवस्था। भला जिस ने कुण्डलीयाँ बना संसार को पैदा न किया होता, किसी ने परमात्मा किसी को संसार में भेजा, किसी ने संसारी जीवन ही न तो सब को दिया संसार बन न सका बिना परमात्मा शक्ति के सब ही को सब को ही अपनी ही शक्ति बना, सो तो बना परमात्मा का बनाया ही सब कुछ बना तो कुण्डली के द्वारा भला कब कुण्डली बनाने वाले का सम्बन्ध सब से बना सकता है। जरा सोच समझ कर तो ही देखो तो, भला कुण्डली बनाने वाले ने क्या सब को बनाया वा बना सकता है संसार को, जो सब का सम्बन्ध सब से इस रूप बना सकता है जिस का सब से सब सम्बन्ध बने, न कुण्डली ही के द्वारा कोई बन सका संसार न ही बन सकता कभी संसार, न कुण्डली के साधन द्वारा कोई संसार में सब काम चला सका, न बना सकता ही है सब काम सब का बना कुण्डली द्वारा संस्कार का काम तो, सो तो सब काम सर्वशक्तिमान के बनाये ही से चला संसार व्यवस्था का संसार स्वरूप व्यवस्था के साथ चलता ही रहा या चल रहा या चले ही तो संसार का सब काम बन सके या बन सका, सब ही का सब कुछ सब से बना हुआ, सब का मिला हुआ। जरा तो ही तो सब ही सोच कर देखो कुण्डली बनाकर भला सब काम का ठिकाना क्या बन सकता था। क्या कभी शक्ति के बिना जन्म-मरण काम सब या जन्म-मरण सब सब को कुण्डलियों के द्वारा हो सका था क्या या हो रहा या होगा ही जिस काम को संसारी जीव द्वारा सब ही को सब कुछ दिया गया, जिस ने सब को बनाया उसी द्वारा सब कुछ चला वा दिया हुआ सब को सब कुछ संसार द्वारा सब को सब कुछ सब को दिया गया वा मिल रहा, सो सब साधन तो सब को परमात्मा ही, कुण्डलियों द्वारा नहीं-सब कुछ मिल सका। भला जब सब कुछ सब का चलाने वाले को ही आधार बना माना गया, किसी ने आज तक सब सब काम संसार द्वारा सब ही का तो किया वा, सब कुछ दिया? सो तो सब कुछ सब ही का काम था, जो सब का आधार बना चला आ रहा, सो संसार सब को ही सब काम सब ही का सब कुछ द्वारा संसार को ही आधार बना, सब संसार सब को ही सब कुछ बना ही दिया! तो जिस को, जो कुछ बना मिलना था सब मिला! जन्म-मरण का सब साधन सब मिला! सो सब मिला सब मिला, सब कुण्डली द्वारा मिला? किसी तरह भी सब कुछ तो परमात्मा का बनाया जन्म-मरण का सब काम बना, सो सब अपना दिया सब को दिया सब काम जो कुण्डली द्वारा न सब का हो सका न सब कुण्डली से सब का काम चला ही सब संसार का, न किसी तरह भी परमात्मा शक्ति भिन्न-भिन्न या सब प्रकार की थी, जो बिना शक्ति साधन परमात्मा के अपना काम कर या हो सकती या हो, किसी का सब काम सब प्रकार का सब ही रूप से आधार सब कुछ ही का बना रूप स्वरूप सब शक्ति परमात्मा के सर्वव्यापी व्यवस्था सब प्रकार से बना ही सब जन्म-मरण काम का। बिना सब को परमात्मा की व्यवस्था सब काम को किये न, तो काम चलता न कभी! ना न काम हो सब काम सकता? सो तो सब सब काम चला ही शक्ति के द्वारा बना, ना काम सब रूप में सब का सब काम बनाता या बनता सो परमात्मा का, संसार का रूप सब शक्ति के द्वारा ही सब जन्म-मरण बना सब प्रकार से जगत में सब का साधन बना बना जगत रूप में सब को साधन सब तरह से ही मिला रहा वा रहा, जिस का साधन आधार संसार बना हुआ। सो शक्ति ज्ञान सब सब सब काम सब आधार रूप में सब सब को ही दिया जिस द्वारा सब ही को संसार का सब ही तो सब काम बन कर सब का साधन बनके ही चला सब काम बना, सो बना सब का सब काम सब ही काम से सदा हुआ चला, सो ही सदा चला चला सब व्यवस्था नियम सब ही को सब सब सब 259