एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)
DevanagariHindipublished322 पृष्ठ
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द-ि-य-ा ग-य-ा ह-ै क-ि म-ा-त-ा-प-ि-त-ा न-े स-न-्-त-ा-न क-े
Line 51: पालन-पोषण में जो कष्ट सहन किये, उनका बदला सन्तान कभी नहीं चुका सकती। माता-पिता प-ा-ल-न-प-ो-ष-ण म-े-ं ज-ो क-ष-्-ट स-ह-न क-ि-य-े, उ-न-क-ा ब-द-ल-ा स-न-्-त-ा-न क-भ-ी न-ह-ी-ं च-ु-क-ा स-क-त-ी। म-ा-त-ा-प-ि-त-ा
Line 52: ने सन्तान को केवल जन्म ही नहीं दिया, बल्कि उसे अच्छा नागरिक भी बनाया। न-े स-न-्-त-ा-न क-ो क-े-व-ल ज-न-्-म ह-ी न-ह-ी-ं द-ि-य-ा, ब-ल-्-क-ि उ-स-े अ-च-्-छ-ा न-ा-ग-र-ि-क भ-ी ब-न-ा-य-