भारतकोश
क्रांतिबीज (बोध-कथाएँ एवं प्रेरक विचार-पत्र)

क्रांतिबीज (बोध-कथाएँ एवं प्रेरक विचार-पत्र)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: क्रांतिबीज (बोध-कथाएँ एवं प्रेरक विचार-पत्र) · जीवन जागृति केंद्र / ओशो इंटरनेशनल · 1970 (उद्गम)

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जब भगवान् का सम्बन्ध ही अपने स्वरूप जैसा है तो जीवात्मा का अन्य सम्बन्ध संसार से अथवा शरीर से अथवा अपने सिवाय अन्य किसी से, अर्थात् ईश्वर से भिन्न से तो मानना केवल भ्रम मात्र ही समझना चाहिये और यह जानना ही सर्वथा सत्य है। स्वयं तो सर्वेश्वर सब प्रकार समर्थ ही ठहरे तो अस्वाभाविक रूप अर्थात् 'स्व' का सम्बन्ध या त्याग रूप जो 'जीव' का सम्बन्ध अथवा भाव 'जीव' रूपी अहंता को लिये 'जीव' स्वरूप मानना अथवा उस 'जीव' का जो अज्ञान रूप सम्बन्ध सत्य रूपी स्वीकार या 'स्व' रूप हो ही नहीं सकता, तो 'स्व रूप' का त्याग रूप विकार सर्वथा असत्य रूप 'जीव' रूप का सम्बन्ध 'अस्वाभाविक' हुआ। अतः शुद्ध, सच्चिद् रूप तत्व-का स्वरूप कभी भी नष्ट या विकार युक्त या सीमित हो ही नहीं सकता इन सब बातों अर्थात्; 1 सर्व प्रकार समर्थता- सर्वसमर्थतायुक्तता,; 2 सब प्रकार व्यापक- सर्वव्यापकयुक्तता, से; 3 सब प्रकार नियन्त्रण- सर्वनियन्त्रणयुक्तता युक्त होना स्वाभाविकता- सर्वेश्वर का रूप ही ठहरा सब से विचार-सम्मत ही भगवान् रूप स्वरूप अथवा ईश्वर-तत्त्वरूप- विचार-सम्मत ही सब से ही माना जा रहा सब की समझ से सर्वेश्वर सब प्रकार सर्व समर्थतायुक्त- विचार-सम्मत ही सब की समझ स्वीकार हो ही स्वाभाविकता है। स्वयं का अनुभव या ज्ञान स्वाभाविकता से पृथक् कभी नहीं हो ही नहीं रहा, वास्तविकता सब का स्वयं सब प्रकार से सब ही परमात्मा सत्य-ही सिद्धतापूर्वक स्वाभाविकता सब ही को समझ आती रही, किसी को किसी भी परिस्थिति रूप में भी भिन्न कभी स्वाभाविकता सब प्रकार सब ही भगवान् सम्बन्धी रही। जिसे हर हालत में सब स्वाभाविकतापूर्वक ही स्वीकार करते रहते सब ही जीवात्मा तो सब स्थिति में। 060/ विचार-सम्मतता वास्तविकता से, किसी विषय वस्तुका या सब सब सब सब का सब होना या सब का सब सब सब आधार सब सब सब वास्तविकता सब ही सब का होना या हो ही हो ही रहना सब ही का, सब सब सब सब रूप से सत्य ही सब कुछ सर्वथा सत्य रूप ही तो ठहरा सब का, तो सत्य सब सब का स्वरूप केवल ही, ही ही केवल स्वाभाविकता ही रूप केवल ही ठहरा सब, सब सब सत्य रूप से स्वाभाविकता ही सब सब सब स्वरूप सब प्रकार सब प्रकार का ही ठहरा सब प्रकार स्थिति अनुसार ही! सब स्वाभाविकता सब सब ठहरा हुआ, तो सत्य स्वाभाविकता ही सब प्रकार सत्य रूप स्वरूप ही सिद्ध प्रकार से ही सत्य स्वरूप स्वाभाविकता ही आधार सब सब ही या हो सिद्ध ही सिद्ध सब सब ही सर्वसमर्थतापूर्वक सब ही प्रकार सब स्वरूप ही रूप स्वाभाविकता सब प्रकार ही हो सब प्रकार सब ही प्रकार ही स्वाभाविकता ही स्वरूप ही ही रहा! सत्य स्वरूप ही ठहरा सब, तो केवल मात्र ही सत्य सत्य ही सत्य सब सत्य ही सब प्रकार ही हो सब का स्वरूप ही ठहरा- रूप ही सिद्धता से सत्य रूप सब स्वरूप ही सत्य ही प्रकार से ही ही सब प्रकार स्वरूप सत्य ही सब प्रकार ही तो स्वरूप सब का सत्य रहा न? भगवान् ही सब ही सत्य सत्य ही सब सब का, स्वाभाविकता ही सब ही सब ही सब सत्य सिद्ध स्वरूप सत्य रहा न? भगवान् ही सब प्रकार सब ही सत्य स्वरूप सब का 'स्व' रूप सत्य स्वरूप सब स्वाभाविकता सब की, सब स्वरूप सब की सब प्रकार रूप केवल भगवान् स्वरूप रूप ही, तो सत्य ही सब रूप भगवान् ही सब सब प्रकार ही तो स्वरूप ही सब का हो सिद्ध ही सिद्ध रूप ही ठहरा सब ही का 'भगवान्' रूप स्वरूप ही सब का' सत्य स्वरूप 'स्व, सच्चिदानन्द रूप ही सब प्रकार स्वरूप सिद्ध हुआ।' सब सब सब सब का ही सब ही सब का सब कुछ सत्य सब भगवान् ही सब का ही रूप माता-पिता रूप से सर्व-रूपों में विचार-सम्मत ही सत्य सर्व-रूपों में सब का सब सब ही हो रहा सब, सत्य स्वरूप सब ही ठहरा सब प्रकार से सब सब सब स्वरूप सत्य सर्व रूप सर्व प्रकार से स्वाभाविकता सब स्वाभाविकता ही सब रहा। 39