भारतकोश
माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)

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यम बड़ा कामी, पर हमारा जीव तो इस योग्य नहीं जिस योग्य कन्द--मूल फल फूल हों, दूध घृत जल हों, कन्द मूल फल हों, पत्तल दोना पान हों, सो सब सेवा तो जी को कामि लागि रे! उस बड़े सुजान--जीव को तो जन सेवक ही को सर्वस्व भोग्य वस्तु का पान रहे, सो सब काम लायक विचारि विचारि के सो सेवा को रस ले! सेवक सब जी को रस ही समझ के सो सेवा करे सो सेवा की रिति ३ प्रकार सुझाइ सुझाइ सो सुजन सेवक जानि करै सो सेवा रस क्यों न आवै? तब कृष्ण चरणामृत पान सेवा के रस बिनु सेवक जीव का मन कैसे रहे, सो सेवा बिना और सेवा कैसी सेवा के रस बिना सुख तो पावैगा, पर सेवा बिना रस का रस कैसे पावैगा? सेवा बिना जब जीवन ही न आवै तब तो सेवा रस बिना प्रभु का सुख आवैगा कैसे तब भगवद् के स्वरूप सेवा में लगि के सेवा के सुख में रत हो स्वरूप को सर्वस्व भोग्य समझ के स्वरूप के रस का पान जब स्वरूप के अंग अंग स्वरूप के प्रति अंग स्वरूप के बसनन में स्वरूप के भाव में मन कर अंग अंग रस लीजै तब, रस लीजै स्वरूप, रूप ध्यान में मग्न होइ, रस का रस ऐसा स्वरूप भोग सोय के अंग के भाव रस भोग्य को अंग के स्वरूप रस भोग हो जाय रसमय रूप में स्वरूप का रस भोग सब रस को रसना से भोग रस स्वरूप भोग अंग रस के भाव स्वरूप, रस भोग रूप रस के अंग स्वरूप रस रस भोग स्वरूप के रसामृत में डूब ३ के, स्वरूप रस रस रूप सेवा के स्वरूप रसामृत में सेवा स्वरूप, सेवा स्वरूप के रस रस भोग रस रस भोग रूप के रसामृत स्वरूप के अंग भोग रस स्वरूप के भाव, स्वरूप के स्वरूप सेवा रूप में स्वरूप स्वरूप को रस भोग सो स्वरूप रस के स्वरूप का सो सेवा रूप में स्वरूप का रस आ--भाव समझ के, सेवा स्वरूप के, सेवा स्वरूप आ--भाव स्वरूप के स्वरूप के चरण में बैठ कर सेवा स्वरूप के रस रूप के रस रस रस को स्वरूप सेवा रूप सेवा रूप के रस स्वरूप रस, रस रस स्वरूप रस, रस रस रस, रस रस स्वरूप रस, रस रस रस स्वरूप रस रस के भाव रूप रस, रस रस स्वरूप रस सो सेवा स्वरूप को, सो सेवा चरणारविन्द के चरण रस सेवा को स्वरूप रस समझ स्वरूपारविन्द के अंग रस सेवा रूप भाव--रस, रस स्वरूप, रस रूप, रस स्वरूप, सेवा में रस स्वरूप भाव रस रस के रस स्वरूप सेवा रूप को जान के, सेवा के रस स्वरूप, प्रभु के रस स्वरूप, सेवा के रस स्वरूप, स्वरूपारविन्द के रूप--रसभाव से रस भाव आ-- भाव के स्वरूपारविन्द के रस रस के चरण के रस रस, सो सब रस के रस स्वरूप रस रस रस रस के चरण के रस रस रस रस रस स्वरूप रस के रस रस रस रस रस के रस के रस रस रस भाव, सो चरण कमल रूप रस सेवा रूप रस? सो सेवा को रस समझ कर के रस के रस के रस स्वरूप रस रूप के रस स्वरूप रस रस के रस के रस रस रस रूप रस स्वरूप रस स्वरूप रस रस--रस रस रस सो सब रस स्वरूप, सो सब को रस सब स्वरूप के रस स्वरूप को के चरणारविन्द के रस स्वरूप स्वरूप के चरण के चरण चरण सब रस स्वरूप के स्वरूप रस रस रस रस रस, रस स्वरूप सब के रस रस स्वरूप के रस के रस के स्वरूप के रस स्वरूप के स्वरूप रस स्वरूप स्वरूप स्वरूप के स्वरूप रस रस रस के चरणारविन्द रस के रस रस रस रस रूप रस सब स्वरूप के रस चरण कमल के रस रस रस रस रस के रस रस रस रस रस रस रस रस रस के रस रस रस रस रस स्वरूप के रस रस के रस रस रस रस सब रस, स्वरूप के रस रस रस, सब के रस रस रस के रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस रस के रस रस रस रस रस के रस रस के रस रस सो स्वरूप रस रस के रस, सो रस के रस रस? सो रस के रस रस रस रस! सो रस रस रस के रस रस के रस रस रस 72