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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 101

१०० पद्मावत । तेहि निराश प्रीतम कहँ, जिवनदेउँ का देउँ॥ गौरी हँसि महेशों सों कहा। निश्चयहि बिरहानलैं दहा ॥ निश्चै यहि वह कारनें तपा। प्रवलै प्रेम न आछे छिपा ॥ निश्चै प्रेम पीर यहि जागा। कसैं कसौटी कंचनं लागा ॥ बदनपिंयर जलटपकै नयना। प्रकटै दोउ प्रेमके बयना ॥ यहिं वह जन्म लागके सीखा। चही न औरहि ओही रीझा॥ महादेव देवन के पिता। तुम्हरे शरण राम रणजिता ॥ येहूँ कहँ तस मया करेहू। पूरवहु आश कि हत्या लेहू ॥ दो० हत्या चढ़ायहिं कांधदुइ, औ तिनके अपराध । तिसरेलेहु कि माथे, जोरलिये कियें साध ॥ सुनि के महादेव की भाखों। सिद्धैंपुरुष राजैं मनलाखा ॥ सिद्धहि अङ्गें न बैठे माखी। सिद्धिपलकनहिलावहिंआंखी ॥ सिद्धिहि अङ्गहोय नहिं छाया। सिद्धहोय नहिं भूखनमार्थों॥ जो जगैं सिद्धि गुसाईंकीन्हा। प्रकंटैं गुप्तं रहै कोचीन्हा ॥ बैल चढ़ा कुष्ठी कर भेषूँ। कहिराजासत आहिमहेशू ॥ चीन्हेसोइ रहै तेहि खोजा। जसंबिक्रमं औ राजाभोजा॥ केजिवंतन्तै मन्तै सों हेरा। गयोहिराय जो वह भा मेरा॥ दो० बिनगुरु पन्थै न पावै, भूलासोइ जो मेट । योगीसिद्धहोय तब, जब गोरखै सों भेट ॥ ततखनै रतनसेन घाबरा। छांड़ि डफार पांय लैपरा ॥

महादेवजी १-१८ बिरहकी आग २ जलना ३ संबध ४ ज़बरदस्त ५ सोना ६ ज़ाहिर ७-१५ आवाज़ ८ मेहरबानी ६ बातचीत १० मर्देकामिल ११ बदन १२ दुनियां दौलत १३ दुनियां १४ छिपा हुआ १६ सूरत १७ राजाबिक्रमाजीत १६ तलाश २० देखना व ढूंढ़ना २१ राह २२ नाम योगी २३ यकायक २४ ॥