पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंयहाँ पृष्ठ का यथावत देवनागरी लिप्यंतरण प्रस्तुत है:
पद्मावत । १०६ अगिन श्वास मुख निसरै ताती । तरवरै जरहिं तहां को पाती ॥ रोय रोय सुवे कही सो बाता । रक्त कि आंशु भयो मुखराता ॥ देख करठ जरलाग सो केरा । सो कस जरै बिरह अस घेरा ॥ जर जर हाड़ भये सब चूना । तहां मांस को रक्त बहूना ॥ वै तोंहिं लाग कर्यो सब जारो । तपत मीनै जल रहै न पारो ॥ दो० तुहि कारने वह योगी, भस्म कीन्ह तनदाह । तू अस निठुर निछोई, बात न पूँछी ताह ॥ कहेस सुआ मोसों सुनि बाता । चहौंतो आज मिलों जसराता ॥ पैसो मर्म न जानै भोरों । जानै मर्म जो मर के होरों ॥ हौं जानतहूँ अबहूँ कांचा । नाजेहि प्रीति रंग थिरैं रांचा ॥ नाजेहि भयो मलयगिरि १३ बासा। नाजेहिरबि १४ होय चढ़े उ अकासा ना जेहि होय भँवरकर रंगू । ना जेहि दीपक भयो पतंगू ॥ ना जेहिं किरा भृंगै की होई । ना जेहि आप जिये मर सोई ॥ ना जेहिं प्रेम ओट इक भयो । ना जेहि हिये मांझ डरगयो ॥ दो० तेहिंका कहिये रहन, जो है प्रीतम लाग । जो वह सुने लेइ धस, का पानी का आग ॥ पुनिधने कनक वान मसि १८ मांगी। उत्तरँ लिखत भीजतनआँगी॥ तस कञ्चने कहँ वही सुहागा । जोनिरमलै नगहोयसुलागा॥ हों योगी मठ मएडफ बहोरी २३ । तहवां कसन गांठ तुम जोरी ॥ गा विपभौरें देखके नयना । सखिनलाजका बोलों बयनों ॥ पेड़ १ चदन २ मछली ३ बेक़रार ४ वास्ते ५ जलाना ६ बेदर्द ७-८ भेद ९ नादान १० मरके जलना ११ क़ायम १२ चन्दन १३ सूर्य १४ नाम कौड़ा १५ तिसको रहने के वास्ते क्या कहूँ १६ पद्मावत १७ क़लम १८ सियाही १९ जवाब २० सोना २१ पाक साफ़ २२ जाना २३ बेहोश २४ आवाज़ २५ ॥