पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ३११ होहु चकोर दृष्टि शश पाहां। औ रवि होहु कमल वहमाहां ॥ दो० होहुँ ऐस तुहिराती, सकेसि तो प्रीति निबाह । राहुबेध अर्जुनै होय, जीत दुरपदी ब्याह ॥ राजा यहां तैसे तप झूरा । भा जर बिरह छार कर कूंरा ॥ जिव गँवाय सों गयो विमोही। भाबिनजिव जिवदीन्हेसिओही ॥ कहा पिंगलौ सुखमन नारी। सुन्नसमाधि लाग गइ तारी ॥ बूँद समुद्र जैसो हो मेरा । गा हेराय तस मिलै न हेरा ॥ रंगहि पान मिला जस होय । आपहिं खोय रहा होय सोय ॥ सुवे आय देखा भा नाशू। नयन रक्त भर आये आंशू ॥ सदा प्रीतम गाढ़े करेई। वह न भूल भूला जिव देई ॥ दो० मूरे संजीवन आनके, औ मुखछिड़का नीर । गरुड़पंख जस झारै, अमृत बरसा कीर ॥ मुवा जिया अस वास जो पावा। लीन्हेसि श्वास पेट जिव आवा॥ देखिसि जाग सुआ शिरनावा । पाति दीन्ह मुखबचन सुनावा ॥ शब्दै सुनाय अमीमुख मेला । गुरु बुलाय बेगें चल चेला ॥ तोहि अलि कीन्ह आप भाकेवौ। हों पठवा गुरु बीच परेवा ॥ पवन श्वास तोसों मनलाई। जोवै मारगे दृष्टि बिझाई॥ जस तुम काया कीन्हों दांहूं । सो सब गुरु कहँ भयो अगाँहूं ॥ तपावन्तैं बालों लिख दीन्हा । बेगें चलावचहूँसिधि कीन्हा॥ दो० वेग चल आवो अस कहेउ, जीव बसे तुम नाउँ । निगाह १ चाँद २ सूर्य ३ नाम भाई राजा युधिष्ठिर ४ रंग ५-६ जुल्म ७ नाम बूटी ८ पानी ६ तोता १० बोल ११ जल्द १२-२४ भँवर १३ केतकी १४ बिचवानी १५ हवा १६ ढूंढ़ना १७ राह १८ निगाह १६ जलाना २० खबर २१ दिन मिला २२ ख़त २३ काम पूरा २५ ॥