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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । १८३ दो० चालनकहँ हम अवतरी, चलन सिखात हँ आय । अब सो चलन चलावै, को राखै गहिपायँ ॥ तुम बारी पिय सोर के राजा । गर्ब क्रोध वोही पै छाजा ॥ सब फल फूल वही की शाखा। चहै सो तोड़े चहै सो राखा ॥ आयसु लहे रहो नित हाथा। सेवा करहु लाय भुइँ माथा ॥ बर पीपर शिरउभै जो कीन्हा । पाकर तिन सूखी फर दीन्हा ॥ बंवर बोड़ शीश भुइँ लावा । बड़फल सुफर वही पै पावा ॥ आँव जो फरके नवै तराहीं । तब अमृतभा सब उपराहीं ॥ सोइ पियारी पियाहिँ पिरीती । रहै जो आयसुँ सेवा जीती ॥ दो० पोथीकाढ़ गवन दिन देखे, कौने दिन है चाल । दिशाशूल औ वक्रयोगिनी, सौहंन चलिये काल॥ अदिते शुक्रपश्चिमदिश राहू । बेफै दक्षिण लंकदिशे दाहू ॥ सोमैँ शनीचर पूरुब न चालू । मंगर बुद्ध उत्तरदिश कालू ॥ आवशैं चला चहै जो कोई । औषधि कहूँ रोग नहिं होई ॥ मङ्गल चलत मेल मुखधनियां। चलै सोम देखें दरपनियां ॥ शुकहिं चलत मेल मुखराई। बेफै चलै दक्षिण गुड़ खाई ॥ अदित तंबोल मेल मुखगुण्डी। बायबरंग शनीचर खण्डी ॥ बुधदधि किये चलहुभोजना । औषधि यहि न आनखोजना॥ दो० अवसुनि चक्र योगिनी, ते भुइँ थिरै न रहाहिं । तीसोदिनँ सचन्द्रमा, आठो दिशा फिराहिं ॥ बारह उनइस चार सताइस । योगिनपच्छमदिशा गिनाइस॥ पैदा १ पैरपकड़के २ राजाभोज ३ गुरूर ४ हुक्म ५-६ बलन्द ६ कद ७ शिर ८ सामने १० इतवार ११ उत्तर तरफ़ १२ सोमवार १३ ज़रूरत १४ दही १५ क़ायम १६ दिन १७ ॥