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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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रसनौं सुनहिजोकहिरसबाता। कोकिलबैनें सुनतमनराताँ॥ अमृत कोप जीभ जनु लांई। पान फूल अस बात सुहाई॥ चातृकें वैन सुनतहो शांती। सुने सो परै प्रेम मधुमाती॥ विरवासूख पात्र जस नीरूँ। सुनत बैन तस पलहिशरीरू॥ बोल सेवात बुन्द जनु परहीं। श्रवनैं सीप सुखमोती भरहीं॥ धनवै बैनै जो प्राण अधारू। भूखे श्रवणहिं दीन्ह अहारू॥ उन्हबैनैंहिंकी काहिनआसा। मोहहिंमिरगबिहँसतेहिश्वासा॥ दो० कण्ठं शारदा मोही, जीभ सरस्वती काहि। इन्द्रचांदरवि देवता, सबै जगत मुखचाहि॥ श्रवनैनसुनहिजो कुन्दनसीपी। पहिरे कुण्डल सिंहलदीपी॥ चाँदसूर्य्यदुहुँदिशिचमकाहीं। नखतहिं भरी निरखें नहिंजाहीं॥ क्षणक्षणैंकरहिंवीजै असकांपी। भ्रमरमेघमहँ रहहिं न झांपी॥ सूख शनीचर दुहुँ दिश मतें। होहिं निरारें न श्रवणहिहुतें॥ कांपतरहहिं बोल जोवैना। श्रवणहिंजनुलागहिंफिरनयना॥ जो जो बात सखिन सोंसुना। दुहुँदिशकरहिंशीश वै धुना॥ खूँट दोउ ध्रुव तैरैं खूटी। जानहु परहिं कचपेंची टूटी॥ दो० वेद पुराण ग्रन्थ जित, सबै सुने सिख लीन्ह। नाँदविनोदरागरसवंदक, श्रवणवहीविधिदीन्ह॥ कमल कपोलैं वही अस छाजे। औरन काहि दई अस साजे॥ पुहुपैं पंग रस अमी सँवारी। सुरँग गेंद नारँग रतनौरी॥ पुनि कपोलैं बायें तिल परा। सोतिलबिरह चिनग के करौँ॥ जीभ १ आवाज़ २-७-६ लाल ३ पपीहा ४ पानी ५ कान ६-८-१२ गला १० सूर्य ११ देखना १३ हरसाइत १४ बिजुली १५ अलग १६ बाली १७ नखत १८ छोटे नखत जो चांद के आसपास होते हैं १६ गाने-बजाने का शौक ईश्वरने दिया २० गाल २१-२४ फूल २२ लाल २३ मानिन्दर२५