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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 234

पद्मावत । ३३३ देखत हियो काढ जिव लेई । हिया काढ के जान न देई ॥ कनकें अँगूठी औ नग जड़ी । वह हत्यारिन नखतैंहिं भरी ॥ दो० जैसी भुजा कलाई, तेहि विधि जाय न भाख । कङ्कन हाथ होय जेहि, तेहि दर्पन का साख ॥ हियोँथार कुचें कनककचूरां । जानहुँ दोउ श्रीफलँ जूरा ॥ एक पार्टै वे दोनों राजा । श्यामछत्र दूनहुँ शिर छाजा ॥ जानहु दुइलडू इकसाथा । जग भा लडू चढ़ै न हाथा ॥ पातर पेट आहि जनु पूरी । पान अधार फूल अस गोरी ॥ रोमावलि तेहि ऊपर झूमा । जानँहुँ दोउ शाम औ रूमा ॥ अलकें भुअंगिनितहिपरलोटा । हियेँ करएकखेल दुइ गोटा ॥ बानेँ पुकार उठे कुचँ दोऊ । नाग शरन वह पाव न कोऊ ॥ दो० कैसहिं नवहिं न नाये, यौवन गर्व्व उठान । जो पहिले कर्र लावे, सो पावै रँत मान ॥ भृंगै लंकें जनु भांझनलागा । दुइखंडनलिनेंमां भज नु तागा ॥ जब फिर चलै देख वह पाछे । अप्सरें इन्द्रकेर जनु कौंछे ॥ जोह चलै मन भा पछताऊ । अबहूँ दृष्टि लाग वह भाऊ ॥ वही गवन छिप अप्सर गई । भई अलोपे ना परगटै भई ॥ हंस लजाय समुद्र कहँ खेली । हँस्ती लाज धूर शिर मेली ॥ जगत में स्त्री देखी मोहूँ । उदय अस्त नारि ना कहूँ ॥ महिमण्डल तौ ऐसौ न कोई । ब्रह्मण्डल जोहोय तो होई ॥


दिल १ सोना २ तयां नाग ३ सोना ४ छाती ५-१३-१५ सोनेकी कटोरी ६ नारियल ७ तख्त तंग दुनिया ६ नाममुल्क १० चाल ११ नागिन १२ तीर १४ गरूर १६ हाथ १७ सुर्खे १८ गंभीरी १६ कमर २० कोका- बेली २१ परी २२ सारीपहिने २३ निगाह २४ गायब २५ ज़ाहिर २६ हाथी २७ स्वर्गलोक २८ ॥