पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 254, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । २५३ हुडुकैबाज डफैबाज गँभीरा । औ बाजहिं भलझाँझमँजीरा ॥ तन्त वितन्त शुश्रैं घनतारा । बाजहिं शब्द होय झनकारा ॥ दो० जग शृंगार मनमोहन, पातुर नाचहिं पांच । बादशाह गढ़ छेंका, राजा भूला नाच ॥ बीजा नगर केर सब गुनी । करहिं अलाप बुद्धि चौगुनी ॥ प्रथमँ रागभैरौँ ६ तेहि कीन्हा । दूसरे मालकोसँ पुनि लीन्हा ॥ रागहिंडोलँ सो तिसरे गाई । चौथे मेघ मलार सोहाई ॥ पँचयें शिरी १० राग भलाकिया । छठयें दीपकै उठा बरदिया ॥ छह्रो राग गाये भल गुनी । औ गाई छत्तिस रागिनी ॥ ऊपर भई सो पुतली नाचहिं । तर भये तुर्क कमानैं खाँचहिं ॥ काढ़ा माथा घुमरौँ झुमरा । तर भये देख मीर औ उमरा ॥ दो० सुनसुन शीशैंधुनहिं सब, करमलिमलिपछिताहिं । कब हम हाथ चढ़हिं यहि, कै तब यहदुखजाहिं ॥ छह्रों राग गावैं पातुरैंनी । पुनि तेहिकीन्ह लियेरागिनी ॥ भाकल्यानें कान्हरौ कीन्हीं । रागविहागै किदारौ लीन्हीं ॥ ललितैं बँगलाँ गीतहिंसोई । आसाँवरी भयो सब कोई ॥ धनाशिरी २४ सोहो २५ सोकीन्हीं । भयोबिलावलै मारूँ लीन्हीं ॥ रामकली २६ गुनकली सोहाई । सारँग औ विभासैं मुँहआई ॥ नितमलौरै जौ मिला सुनाई । श्यामै गूजरी पुनि भलगाई ॥ पुरैवी औ देसाखै कुरारी । ३४ तोड़ी ३५ गौड ३६ सोभईनिरारी ॥ दो० गौरी ३७ गौराँ तरवनै, सिद्ध अलापहिं ऊँच । .नामबाजा १-२-३ मोटे बहुत तार ४ पहिले ५ नाम राग ६-७-८-६- १०-११ मुसलमानलोग तोपें मारते थे १२ जिसने राजा की फ़ौजसे शिर निकाला वह वहीं रहा १३ शिर १४ हाथ १५ तवायफ़ १६ नाम राग रागिनी १७ से ४० तक ॥