पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६८ पद्मावत । राजा की सोरहसै दासी। तिन महँ चुन काढी चौरासी ॥ बरणे बरण सारी पहिराई। निकस मँदिर ते सेवा आई ॥ जनु निसरीं सब बीरबहूटी। रायँसुनी पिंजर हुत छूटी ॥ सबै प्रथम यौबन सोहैं। नयन बानै औ सारँगै भौंहैं ॥ मारहिं धनुर्ष केर शिर श्रोहीं। वनघंटवाट धनुषजित श्रोहीं ॥ कामैकटाक्ष हनहिं चितहरणी। एक एकते आगर बर्रणी ॥ जानहुँ इन्द्रलोक ते काढी। पांतहि पांत भई सब ठाढी ॥ दो० शाह पूँछ राघव पहँ, सबते कही बैनाहिं । तुइजोपद्मिनी बरैणी, कहुसोकौनइनमाहिं ॥ दीरघआये भूमिपति११ भारी। इनमें नाहिं पद्मिनी नारी ॥ यहि फुलवारसोबहुकी दासी। कहँ केतकी भँवर सँग बासी ॥ वह सो पदार्थै ये सब मोती। कहँ वह दीप पतँग जहँज्योती ॥ ये सब तरैंई सेव कराहीं। कहँवहशैशिशिदेखतछिपजाहीं ॥ जबलगसूरैकीदृष्टि १७ अकाशु। तवलगशैशिनहिंकरैप्रकार्शू ॥ सुनके शाह दृष्टि२० तर नावा। हम पाहुन यहिमँदिरपरावा ॥ पाहुन ऊपर हेरै२१ नाहीँ। हना राहु अर्जुन परछाहीं ॥ दो० तपौ बीज जस धरती, सूख बिरह के घाम । कबसोदृष्टि२२ करबरसहि, तनतरवैर२३होयजाम॥ सेव करें दासी चहुँ पासा। अप्सरैं जानु इन्द्र कैलासा ॥ कोउ परात कोउ लोटा लाई। शाह सभा सब हाथ धोवाई ॥ कोई आगे पनवार बिछावहिं। कोई जेवन लै लै आवहिं ॥ रंगबरंग १ नाम जानवर २ नौजवान ३ तीर ४ कमान ५-६ तिरछी निगाह ७ ज्यादा ८ बयान करना ६-१० बड़ीउमर ११ ज़मीनका मां- लिक १२ जवाहिरात १३ छोटेनखत १४ चांद १५-१८ सूर्य १६ निगाह १७ रोशनी १६ नज़र २०-२२ देखना २१ पेड़ २३ इन्द्रलोककी परी २४ ॥