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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पद्मावत । २६ उनई घटा पराजग छाहां। शंशि की शरण लीन्ह जनु राहू॥ छिपगये दिनभानु कीदसा। तेहि निशि नखतचांद परगसा॥ भूल चकोर दृष्टि तेहि लावा। मेघघटा महँ चन्द दिखावा ॥ दशन दामिनी कोकिलभाखै। भौहैं धनुष गगन लैराखै ॥ नयन खंजन दुइ केल करेहीं। कुच नारंग मधुकैरै रसलेहीं ॥ दो० सरोवर रूप विमोहा, हिये हिलोर करै। पाउँ छुवे मगैं पाउँ, तन मन लहरें दे ॥ (५१) धरी तीर सब कंचुक सारी । सरवर महँ पैठीं सब वौरी ॥ पानी तीर जानि सब बेलैं। हुलसैंहिं करहिंकामकी केलैं॥ करलैं केश विषहरैं विषभरे। लहरें लेहिं कमल मुख धरे ॥ नवल वसन्त संवारे कैरी। होय प्रकट जानहु रस भरी ॥ उठी कोप जस दाँड़िम दाखौं। भई अनन्त प्रेमकी साखा ॥ सरवर नहिं समाय संसारा। चांद नहाय बैठिलिये तारा ॥ धनसों नीर शेशि तैंरई उई। अबकित दृष्टि कमलऔकोई॥ दो० चकई बिछुर पुकारी, कहां मिलहो नांह। (५२) एकचन्दनिशि स्वर्ग महँ, दिनदूसरजलमांह ॥ लागीं केलकरैं मँझ नीराँ। हंस लजाय बैठिहै तीराँ ॥ पद्मावतिकौतुक कहँराखे। तुमहिंशशि होहितराये नहिंराखे ॥ बाद मेल के खेल पसारा। हार देव जो खेलत हारा ॥ दुनिया १ चांद २-३१-४१ सूर्य ३ रात्रि ४ खिलना ५ निगाह ६-३३ दाँत ७ बिजुली ८ कोकिला कीसी बोली ६ कमान १० आसमान ११-३६ आँख १२ छाती १३-१८ भँवर १४ तालाब १५-१६-२६ दिल १६ शायद १७ लड़की २० खुशहोना २१ मुलायम २२ बाल २३ सांप २४ कली २५ ज़ाहिर २६ अनार २७ अंगूर २८ पानी ३०-३८ नखत ३२ क़ोकाबेली ३४ राति ३५ बीच ३७ किनाग ३६ तमाशा ४० नखत ४२ ॥