पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ पद्मावत । तादिन ब्याधैं भयो जिवलेवा। उठी पांख भा नाउँ परेवाँ ॥ भईव्याधै तृष्णाँ सुखखाधू। सूझी भुक्ति न सूझै ब्याधू ॥ हमहिं लोभ वह मेला जारा। हमहिं गर्व वह चाहै मारा ॥ हम निश्चिंतै वह आवछिप्राना। कौन व्यार्थ है दोपै अयानो ॥ दो० सो अवगुणेँ कित कीजिये, जिवदीजे जेहिकाज। अब कहना कुछ नाहीं, मुँह भले पक्षिराजें ॥ चित्रसेन चित्तौरगढ़ राजा। कइगढ़कोतिचित्रैं समै साजा ॥ तेहिकुलं रतनसेन उजियारा। धनि जननी जन्मी असवारों ॥ पण्डित गुण सामुद्रिक देखहिं। देखिरूप औ लगन विशेखहिं॥ रतनसेन यहि कुल निरमरौं। रतनज्योति मन माथे परा॥ पदके पदारथ लिखीसोजोरी। चांद सूर्य जस होय अँजोरी ॥ जसमालतीकहँ भँवरवियोगी। तस वह लाग होय यह योगी ॥ सिंहलद्वीप जाय वह पावा। सिद्ध होय चित्तौर लै आवा॥ दो० भोग भोजैं जस मानी, विक्रमैं शाका कीन्ह। परख रतन जो पारखी, सबै लिखन लिख दीन्ह ॥ चित्तौर गढ़ कर एक बँजारा। सिंहलद्वीप चला व्योपारा ॥ ब्राह्मणहुत एकनिपैटैं भिखारी। सो पुनि चला चलत व्योपारी ॥ ऋणैं काहूकर लीन्हेंसि काढ़े। मँग तेहिगये होय कछु बाढ़े ॥ मारगें कठिनैं बहुत दुख भये। नांघ समुद्र द्वीप वह गये ॥ देखि हाँट कुछ सूझे न ओरा। सबै बहुत कुछ देखि न थोरा ॥ चिड़ीमार १-३ उड़नेवाले जानवर २ दुनियाकी हवा हवस ४ रोज़ी ५ बहे- लिया ६-६ गरूर ७ ग़ाफ़िल ८ क़सूर १० नादानी ११ बुरा काम १२ चुप १३ उड़ने वाले जानवरों के राजा १४ तसवीर १५ बराबर १६ लड़का १७ पाक १८ लाल जवाहर १६ रोशनी २० दुःखी २१ नामराजा २२ राजा विक्रमादित्य २३ बहुत ग़रीब २४ क़र्ज़ २५ शायद वा कदाचित् २६ राह २७ मुश्किल २८ बाज़ार २६॥