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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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४० पद्मावत । पंख न राखी होय कुभाखी । लेतहँ मारि जहां नहिं साखी ॥ दो० जेहि दिनका मैं डरतहौं, रयनि छिपानो सूर । सो लैदे कमले कहँ, मोकहँ होय मयूर ॥ धाय सुआ ले मारे गई । समुझि ज्ञान हिरदै मत भई ॥ सुआ सुराजा करि बिशरामे । मारन जाय चहै जेहि स्वामे ॥ यह पण्डित खण्डित बैरागु । दोपं ताहि जेहि मूझि न आगू ॥ जो तिरियों के काज न जाना । परै धोख पाछे पछताना ॥ नागमती नागिन बुंधे ताऊ । सुआ मयूर होय नहिं काऊ ॥ जोनहिंकंत की आयसु माहां । कौन भरोस नारिकी बाहां ॥ मगैं यहि खोजहोय तसआय । तुरी रोग हरि माथेजाय ॥ दो० दुइसो छिपाये ना छिपे, इकहत्या अरु पाप । अन्तहि करहिं बिनाश यह, मैं साखी दै आप ॥ राखामुझा धांये मति साजा । भयोखोज तस आयोराजा ॥ रानी उतर माने सों दीन्हा । पण्डित सुआ मॅजारी लीन्हा ॥ मैं पूंछ्यो सिंहल पद्मिनी । उतरे दीन्ह तुम्हको नागिनी ॥ का तोर पुरुष रयनि करराऊ । उल्लुनजानिदिवैसे करभाऊ ॥ वैजसदिन तूनिशि अँधियारी । जहांबसन्त करीलकोवांरी ॥ का वह पंख कूट मुहँ कूटे । अस बड़बोल जीभ मुख छोटे ॥ जहर चुवै जो जो कहि बाता । अस हत्यार लिये मुखराताँ ॥ दो० माथे नहिं बैसारी, जो शठ सुआ सलोने ।

१ गवाह २ राति २-२४-२६ सूर्य ३ पद्मावति ४ मोर ५-१३ लौंडी ६- २० दिल ७ आराम ८ मालिक ६ पाप १० औरत ११-१६ अक्ल १२ खाविन्द १४ हुक्म १५ शायद १७ घोड़ा १८ बन्दर १६ जवाब गरूर से २१ बिल्ली २२ जवाब २३ दिन २५ बागीचा २७ उड़ने वाले जानवर २८ ज़हर २६ लाल ३० बैठालना ३१ खूबसूरत ३२ ॥