पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 62, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ६१ तुम अस बिछुड़े पीव पिरीता । जहँवां राम तहां सँगसीता ॥ जबलहिजिवसँग छांड़िनकायाँ । करिहौं सेव प्रखारहूँ पाया ॥ भली पद्मिनी रूप अनूपौँ । हमसे कोइ न आगोरि रूपा ॥ भौहें भली पुरुपनेँ की दीठी⁶ । जहँ जाना तहँ दीन्ह न पीठौ ॥ दो० दीन्ह अशीश सबै मिलि, तुम माथे नितँछात । राजकरो चित्तौरगढ़, राखो पिय अहिवात ॥ तुम तिरियाँ मतिहीन तुम्हारी । मूरुख सोइ मता घर नारी ॥ राघव जो सीता सँग लाई । रावणहरी कौन सिधि⁸ पाई ॥ यह संसार स्वप्न जस हेराँ । अन्तै न आपनको कहिकेरा ॥ राजाभरथरिहिं नहिंसुनी अयौनी । जेहिके घर सोरहसै रानी ॥ कुँचै लीन्हे तरवा सहराई । भा योगी कोउ संग न लाई ॥ योगी काहि भोग से काजू । चही न मेहरी चहै न राजू ॥ जूड़ि करकटौ पै भीखहिचाहा । योगी ताँतै भात सों काहा ॥ दो० कहा न मानी राजा, तेंजी सवाँई भीर । चला छांड़िकै रोवत, फिरिके दीन्हन धीरे ॥ रोवत माता फिरै न बाँराँ । रतनचला जगँ भा अँधियारा ॥ बांरे मोर जियावैर रता । सो लैचला सुत्रों परवता ॥ रोवहिं रानी तँजेहिं पराना । फोरहिंवरी²³ करहिं खरिहाना ॥ चूरहिंगें अभरने उरेँ हारू । अव काकहँ हम करव शिंगारू ॥ जाकहँ कही रहसिके पीव । सोई चला काकर यह जीव ॥ बदन १ धोना २ बेमिसाल ३ खूबसूरत ४ मर्द ५ देखना ६-१० हमेशा ७ औरत ८ कामिल ९ आखिर ११ नादान १२ छातीकीडंडी १३ ठंडीरोटीका टुकड़ा १४ गर्व १५ छोड़ना १६-२४ सब १७ धीरज १८ लड़का १६-२१ डुलियां २० ज़िन्दगी का सबब २२ तोता २३ चूड़ी २५ गरदन के ज़ेवर २६ छाती २७ ॥