पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
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कूटस्थदीपप्रकरणम् ३५५ इमं कूटस्थदीपं योऽनुसन्धत्ते निरन्तरम् । स्वयं कूटस्थरूपेण दीप्यतेऽसौ निरन्तरम् ॥७६॥ जो सदा ही इस कूटस्थदीप का विचार करेंगे, वे स्वयं ही सदा कूटस्थरूप होकर चमक उठेंगे । इति श्रीमद्विद्यारण्यविरचितपंचदश्यां कूटस्थदीपप्रकरणं समाप्तम्