भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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४२ पञ्चदशी

निर्जन वन में भय का कोई भी कारण न होने पर, वहां
की सुनसान परिस्थिति से, जैसे अबोध बालक डरा करता है,
इसी प्रकार निर्विकल्प समाधि के शान्त वायुमण्डल से ही दूसरे
योगियों को भय मालूम होने लगता है। उनका उस में जी नहीं
लगता।
अस्पर्शयोगो नामैष दुर्दर्शः सर्वयोगिभिः ।
योगिनो बिभ्यति ह्यस्मादभये भयदर्शिनः ॥२९॥
गौडपादाचार्य के शब्द ये हैं कि—यह जो अस्पर्श योग नाम
की निर्विकल्पसमाधि है, साकार ब्रह्म का ध्यान करने वाले किसी
भी योगी को इस के दर्शन नहीं हो पाते। क्योंकि वे सभी प्रकार
के भेददर्शी योगी लोग [निर्जन वन में बालकों की तरह] इस
भयशून्य समाधि में भय को देखते हैं [किंवा भय के कारण की
कल्पना कर लेते हैं] और इस अस्पर्श योग से डरा करते हैं।
भगवत्पूज्यपादाश्च शुष्कतर्कपटूनमून् ।
आहुर्माध्यमिकान् भ्रान्तानचिन्त्येऽस्मिन् सदात्मनि ॥३०॥
भगवत्पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने तो इन सूखे तर्ककुशल
माध्यमिक बौद्धों के विषय में यह कहा है कि ये लोग अचिन्त्य
सदात्मा के विषय में सदा ही भ्रान्त बने रहते हैं। [इन्हें यह
तत्व कभी भी समझ नहीं पड़ेगा।]
अनादृत्य श्रुतिं मौर्थ्यादिमे बौद्धास्तमस्विनः ।
आपेदिरे निरात्मत्व मनुमानैकचक्षुषः ॥३१॥
भगवत्पूज्यपाद के शब्द ये हैं कि—ये तमोगुणी बौद्ध लोग
अपनी बेसमझी से, श्रुति की परवाह न कर के, निरात्मवाद को
मान बैठे हैं। क्योंकि उन्होंने शास्त्र को छोड़कर, अनुमान