पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
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२८ पंचदशी ब्रह्मज्ञानी कहना भी ठीक नहीं है । अध्यात्मविद्या के पारंगत मुनि लोगों का कहना है कि वे तो साक्षात् ब्रह्मतत्व ही—सर्वव्यापक आत्मतत्व ही—हो चुके हैं । जीव के बनाये हुए द्वैत को जब कोई प्राणी सम्पूर्ण रूप से छोड़ चुकेगा, तभी उसे जीवन्मुक्ति की ऊँची से ऊँची हालत प्राप्त हो सकेगी, इसी विचार को लेकर हमने ईश्वर के बनाये हुए द्वैत से, जीव के बनाये हुए द्वैत को, मुमुक्षु लोगों के सुभीते के लिये, छांट कर रख दिया है ।