पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ
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३६ पंचदशी साक्षी, सभी से प्रत्यक्, सभी से आन्तर, जो कोई तत्व है उसी को हम 'आत्मा' कहते हैं। यह जो आकाशादि संसार हमें दीख रहा है यह सब क्षणभंगुर है। यह क्षणभंगुर संसार अपने स्वभाव के अनुसार जब शेष नहीं रह जायगा, तब जो तत्व शेष बचेगा उस तत्व को ही हम 'ब्रह्म' कहते हैं। वह ब्रह्मतत्व साधक की समझ में आया हुआ, यह ऊपर कहा हुआ,खयंप्रकाश आत्मा ही तो है। इस आत्मा से भिन्न कोई ब्रह्मनाम का पदार्थ होता होगा यह विचार प्रमाणानुमोदित नहीं है। इस आत्मा से भिन्न किसी को ब्रह्म समझना भारी से भारी भूल है।