पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)

पञ्चसिद्धान्तिका (आचार्य वराहमिहिर - सूर्य, रोमक, पौलिश, वासिष्ठ एवं पितामह सिद्धान्त)
Panchasiddhantika of Acharya Varahamihira with Commentary
आचार्य वराहमिहिर द्वारा
DevanagariHindipublished419 पृष्ठ
पृष्ठ 373, कुल 419 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 373
XVIII.50 XVIII. VĀSIṢṬHA-PAULIŚA – RISING AND SETTING 347 48. In Libra, the gati-s are:
| Degrees | Minutes | Textual (° ') | Calculated (° ') |
|---|---|---|---|
| 1. Rise to Retro. | (21 − 0)×2=42 | 42 + 3=45 | 42 45 |
| 2. Retro. | (21 − 10)×2=22 | 22 − 8=14 | 22 14 |
| 3. Retro. to Set. | (21 − 8)×2=26 | 26 + 1=27 | 26 27 |
| 4. Set. to Rise. | (21 − 0)×2=42 | 42 + 23=65 | 43 5 |
| [वृश्चिक:] | |||
| अलिनि दशघ्नाः [त्रि]-'शशि'-('शिखि')-'कृताः' ('षडी'-'शा'-) 'र्णवा'-('क्षि')-युताः । | |||
| तेऽंशा 'यम'युता 'मुनि'विहीना 'त्रि'-'षड्' 'विंशत्या' (समेताश्च) ॥ ४९ ॥ |
- In Scorpio, the gati-s are: | Degrees | Minutes | Textual (° ') | Calculated (° ') | | :--- | :--- | :---: | :---: | | 1. Rise to Retro. | 10×3+ 6=36 | 36 + 2=38 | 36 38 | 35 39 | | 2. Retro. | 10×1+11=21 | 21 − 7=14 | 21 14 | 21 16 | | 3. Retro. to Set. | 10×3+ 4=34 | 34 + 3=37 | 34 37 | 33 38 | | 4. Set. to Rise | 10×4+ 2=42 | 42 + 26=68 | 43 8 | 43 6 | [धनु:] धन्वनि द्विदशावष्टौ, [विंशं], षट्सप्तकं, 'कृतोनं' च । ते ('इषु'युत) 'विषयोनाः' ('शैला' : त्रिंशा) न्विता भागाः ॥ ५० ॥ 48a. A.B. रेकेण b. A.B. व्यनखांसां तिथिद्विसंगुणैश्च; C. हीना खाशाग्रिभिर्द्विसंगुणाश्च; D. युता जूके सशून्यतिथिर्द्विसंगुणाश्च | d. A.B.C.D. ह्येक (A. ध्येक) त्रिंशद्युताश्चैव | 49a. A. दशघ्नी; B. दशघ्ना b. A.B.C.D. शशिकृत (B. om. त, D. शशिद्विकृत) for त्रिशशि. A.B. दहनाः षड्खरावर्णवाष्टयुताः; C. दहनयुगा वसु-शराणंवाष्टयुताः; D. दहनाः शरार्णवाष्टयुताः | c. A. तेशा; B1.3. तेषां. A.B.D. यममुनीशोना; C. यममुनीशेन d. A.B. समेना व (B. च)