भारतकोश
पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पण्डित विष्णु शर्मा द्वारा

स्रोत: पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र) · श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम प्रेस, बम्बई · 1910 (उद्गम)

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( १३२ ) पञ्चतन्त्रम् ।

सकोपमिदमाह- "धिक् पापाधम ! यद्येवं भूयोऽपि वदसि ततः त्वां तत्क्षणमेव वधिष्यामि यतो मया तस्य अभयं प्रद- त्तम् । तत् कथं व्यापादयामि । उक्तञ्च- सो अभय दान देकर हमारे निकट लाओ जिससे यहां आनेका कारण पूँछूं"। तब यह सबने विश्वास दे अभय दानकर उसको मदोत्कटके निकट लाकर प्रणाम कर बैठाया । तब उसके पूछनेपर उसने अपना वृत्तान्त सार्थसे छूटनेका निवे- दन किया, तब सिंहने कहा"-भोः क्रथनक ! अब तू फिर गांवको जाकर भार उठानेके कष्टका भागी नहो । सो इसी वनमें शंकारहित होकर मरकतमणिके सदृश तृणके अग्रभागोको भोजन करता हुआ हमारे साथ सदैव निवासकर"। वहभी "बहुत अच्छा"कह उनके मध्यमें विचरता हुआ निर्भय सुखसे रहता था। एकदिन मदोत्कटका वनचारी महाग़जके साथ युद्ध हुआ, तब उसके दांतरूपी मूसलके प्रहारसे उसको बडी व्यथा हुई । परन्तु व्यथित होकर किसी प्रकार प्राणोंसे मुक्त न हुआ, परन्तु शरीरकी असामर्थ्यसे सर्वथा चलनेको भी समर्थ नहींथा । वेभी सब काकादि प्रभुके अशक्त होनेसे क्षुधासे परम दुखको प्राप्तहुए। तब उनसे सिंह बोला, - "भो ! कहीं कोई जीवकी खोज करो जिससे मै इस दशामें भी प्राप्त हुआ उसे मारकर तुम्हारा भोजन सम्पादन करूंगा" तब वे चारोंभी भ्रमण करने लगे जब कोई जीव नहीं पाया तब कौए और गीदड परस्पर मंत्रणा करने लगे, शृगाल बोला, - "भो वायस ! बहुत घूमनेसे क्याहै यह हमारे प्रभुका विश्वासी क्रथनक मौजूदहै। सो इसे मारकर हम प्राणयात्रा करें"। काक बोला- ' आपने सत्य कहा, परन्तु स्वामीने उसको अभयदान दियाहै इस कारणसे वह वध्यनहीं है"। शृगाल बोला, - "वायस ! मै स्वामीसे विज्ञप्ति कर ऐसा करूंगा जो स्वामी उसका वधकरे सो आप यहीं स्थित रहो जबतक मैं घर जाय प्रभुकी आज्ञा लेकर आऊं" । यह कह वह सिंहकी ओरको चला । और सिंहको प्राप्त होकर बोला,-"स्वामी ! हम सम्पूर्ण वन घूम आये, परन्तु कोई जीव प्राप्त नहीं हुआ । सो हम क्या करें अब हम भूखसे एक चरणभी नहीं चल सकते हैं. आप- कोभी पथ्य व्यापार करना युक्त है । सो यदि स्वामीकी आज्ञा हो तो क्रथनकके मांससे आज भोजन व्यापार किया जाय" । तब सिंह उसके दारुण वचन सुन- कर क्रोधसे यह बोला, - "पापाधम ! धिक्कार है तुझे ! यदि फिर ऐसा कहेगा