भारतकोश
पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पण्डित विष्णु शर्मा द्वारा

स्रोत: पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र) · श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम प्रेस, बम्बई · 1910 (उद्गम)

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( ८ ) पञ्चतन्त्र भाषाटीकाकी- श्लोक संगृहीत किये इसकारण नीतिशास्त्र ग्रन्थके श्लोक और चाणक्यके श्लोक प्रायः एकरूप है। दंडिप्रणीत दशकुमारचीरतके विश्रुतचरित्रमें लिखा है कि, विष्णु गुप्त अर्थात् चाणक्यने मौर्य्यवंशीय महाराज चन्द्रगुप्तके लिये पूर्वप्रचलित नीतिशास्त्रको संक्षिप्त करके छः सहस्र श्लोकोंमें निबद्ध किया, शास्त्रके पारगामी महापंडित विष्णुशर्माको जगत्का प्राचीन रत्नसंग्रहकर्ता पुरुष कहना उचित है, यह सत्य है कि, इन्होंने यह ग्रन्थ प्राचीन ग्रन्थ बार्ह- स्पत्य, महाभारत, आदिग्रन्थोंसे संग्रह किया है, परन्तु इन्होंने यह रत्न अपूर्व आख्यायिका रूप सूत्रमें इस प्रकार गूंथे है कि, उनकी असाधारण बहुदर्शिता, अद्भुत सारग्राहिता, तथा विचित्र रचना कौशलकी सबही मुक्तकण्ठसे प्रशंसा करते हैं, उनका रचित गद्य इतना सरल, मनोहर और शुद्ध है कि उसके देख- नेसेही बोध होता है कि, इसप्रकारका अन्य कोई ग्रन्थ सरलता मधुरतासे पूर्ण संस्कृतसाहित्यमें नहीं है,उनकी चमत्कारिणी गद्यरचना संस्कृतकी गद्यरचनाका आदर्श स्वरूप है, इसमें सन्देह नहीं कि, इन्होंने प्राचीन सामग्रीसे अपनी बुद्धिके बलसे एक अपूर्व नूतन पदार्थकी सृष्टि की है। पञ्चतन्त्रकी कथाओंका मूलतंत्र निरूपण करना बड़ा कठिन है, जैसी कहानी भारतवासी अपने छोटे बालकोंको सुनाया करते हैं और जो बहुत काल- तक क्रमसे कण्ठमेंही चलीआती थीं, वैसीही कथाओंको शिक्षासहित महापं- डित विष्णुशर्माने लिखा है। पञ्चतन्त्रकी कहावत हमारे देशकी शिक्षाका प्रथम सोपान है, तथा मनुष्य जातिका बाल्यावस्थाके निमित्त एक सरल मधुर और कोमल पदार्थ है, तथा जगत्का प्रथम सत्व भारतकी अतिपुरातन श्लाघनीय सम्पत्ति है यह अवश्यही सबको स्वीकार है। महाभारत हमारे देशकी अतिपुरातन सम्पत्ति है, प्रायः महाभारतकी रच- नाको साढेचार सहस्र वर्षसे अधिक व्यतीत होचुकेहैं, इसमें सन्देह नहीं कि, इस ग्रन्थमें मनुष्यजातिके अतिपुरातन चित्र खींचकर सम्पूर्ण नीति और धर्मके आख्यान बड़ी चमत्कारतासे वर्णन किये हैं, अनेक स्थलोंमें पंचतन्त्रकी रीतिके समान धर्मादिविषय निरूपण किये हैं, बहुत क्या पञ्चतन्त्र और हितोपदेशकी कई कथा महाभारतसे लेकर लिखीगई हैं, जैसे व्याध-कपोत आदि इससे विदित होता है कि, कोई २ कथा भारतसे पहले भी विद्यमान थी और अधिक खोज करनेसे यहभी जाना जाता है कि, सबसे अधिक प्राचीन ग्रन्थोंमें भी कहीं कहीं ऐसी कथा लिखी हैं, विष्णुशर्माने कोई पुरानी लिखित कथा और कोई पुरुष परंपरासे प्राप्त प्राचीन कथा संग्रह करके मनोहर लिपिसूत्रमें ग्रथित किया है, इनकी कहावत किस देशमें किस आकार और रूपमें वर्तमान है

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