पञ्चतन्त्रम् (संस्कृत मूल एवं भाषा टीका सहित)
Panchatantram with Sanskrit & Hindi Commentary
पं. विष्णु शर्मा / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । (७)
सूतो वा सूतपुत्रो वा यो वा को वा भवाम्यहम् । दैवायत्तं कुले जन्म मदायत्तन्तु पौरुषम् ॥
अर्थात् चाहै सूत हूं चाहै सूतपुत्र हू जो कोईभी मै हू इससे क्या ? कुलमे जन्म दैवाधीन है परन्तु पुरुषार्थ तो मेरे आधीन है (वेणीसंहार) अर्थात् पुरुषार्थ ही हमारा परिचय है । इसकारण पञ्चतंत्रके कर्ताका नाम धाम वंशका परिचय न पानेसे मनुष्यजातिकी कोई हानि नहीं, उनका यह पञ्चतंत्रही अनन्त काल पर्यत जीव लोकका महाउपकार साधनकर उनके मनुष्यत्वका परिचय प्रदान करता रहेगा ( १ )
पञ्चतंत्र और हितोपदेश यह दो ग्रन्थ विष्णुशर्माके रचित हैं यह प्रसिद्ध है । जिसमे यह पञ्चतन्त्र पहला और हितोपदेश इसका सार लेकर पीछे निर्माण किया गया है, दोनो ग्रन्थोमें एकही वस्तु कथन की है इसमें विस्तार और हितोपदेशमे संक्षेप है । इसमे पांचतंत्र और हितोपदेशमे चार तन्त्र है, कहीं कहीं हितोपदेशमें पचतन्त्रके सिवाय अन्य स्थानोँसे भी सग्रह किया है यथा—
मित्रलाभः सुहृद्भेदो विग्रहस्सन्धिरेव च । पञ्चतन्त्रान्तथान्यास्माद्ग्रन्थादाकृष्य लिख्यते ॥ १ ॥
अर्थात् मित्रलाभ, सुहृद्भेद, विग्रह और सन्धि यह पचतन्त्र तथा अन्य ग्रथोसे लाकर लिखते है । मंगलाचरणमे विष्णुशर्माने मनु, वृहस्पति, शुक्र, पराशर, व्यास, चाणक्यादि नीतिशास्त्र करनेवालोको नमस्कार किया है इससे चाणक्यके पश्चात्ही विष्णुशर्मा हुए है इसमे तो कोई सन्देह नहीं है, कारण कि, नीतिशास्त्रके कर्ता जगत्पूज्य हुए है और ब्रह्मासे यह शास्त्र प्रादुर्भूत हुआ है, महाभारत राजधर्मके ५९ अध्यायमे लिखा है—देवताओकी प्रार्थनासे ब्रह्माजीने लक्षश्लोकमे नीतिशास्त्र निर्माण किया, शिवजीने संक्षेप कर दशसहस्र अध्याय किये और विशालाक्ष शिवका नाम है इस कारण वह शास्त्र विशालाक्ष नामसे प्रसिद्ध हुआ, इन्द्रने शिवजीसे पढ़ पाच सहस्र अध्यायमे संक्षेप कर अपने नामके अनुसार उसका नाम बाहुदन्तिक रक्खा । फिर वृहस्पतिने तीन सहस्र अध्यायोमे संक्षेप कर उसका नाम बार्हस्पत्य प्रसिद्ध किया । शुक्राचार्यने उसे एक सहस्र अध्यायोमे संक्षिप्त कर उसका नाम औशनस रक्खा । गरुडपुराणमे देखा जाता है कि, चाणक्यने वृहस्पतिप्रणीत नीतिशास्त्रका सग्रह कर उससे
१ पञ्चतन्त्रमे बहुतसी कथा महिलारोप्य नगरका परिचय देकर लिखी है, यद्यपि इसका नाम इस समय क्या है सो विदित नही होता परन्तु सूक्ष्मविचारसे विदित होता है कि, कदाचित् यही दक्षिण देशमे विष्णुशर्माके रहनेका स्थान हो ।