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पञ्चतन्त्रम् (संस्कृत मूल एवं भाषा टीका सहित)

Panchatantram with Sanskrit & Hindi Commentary

पं. विष्णु शर्मा / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished536 पृष्ठ

( ५२० ) पञ्चतन्त्रम् ।

दोहा-सीतापति रघुनाथश्री, भरत लषण हनुमान । हिये शत्रुसूदन सुमर, सज्जनको सुखदान ॥ १ ॥ पञ्चतन्त्रभाषा तिलक, कीन्हों मति अनुसार । बारबार शिवपद सुमर, बुधजन प्राण अधार ॥ २ रामनवमि तिथिमेषरवि, कियो संक्रमण आज । प्रेम सहित पूजे सबन, अवधराज महाराज ॥ ३ ॥ सम्वत् युगशर अंकविधु, चैत्रशुक्ल रविवार । नवमीतिथिको ग्रंथ यह, कीन्हों पूर्ण विचार ॥ ४ ॥ वसत राम गंगा निकट, नगर मुरादाबाद । कियो तिलक अतिशोध कर, द्विज ज्वालाप्रसाद॥५॥ वेंकटेश्वर यंत्र पति, खेमराज गुणवान । तिनको कीन्हों भेंट यह, सकलसुमंगल खान ॥ ६ ॥ रामराम सियराम कहु, रामराम सियराम । राम राम के कहतही, सिद्ध होत सब काम ॥ ७॥ बहुरिशारदा शिवाश्री, जगदम्बा गुणगाय । करहुं प्रार्थना जोरकर, कीजे सदा सहाय ॥ ८ ॥ सन्तसमागम जगतमें, सकल सुमंगल मूल । करहिं जो तिनपर लषन युत, राम रहहिं अनुकूल ॥९॥

॥ शुभमस्तु ॥

पञ्चतन्त्रं भाषाटीकासमेतं समाप्तम् ।


पुस्तक मिलनेका ठिकाना-
खेमराज श्रीकृष्णदास,
“श्रीवेङ्कटेश्वर” स्टीम् प्रेस-बंबई.

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