पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 116, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें१०४ पाराशरस्मृतिः [ दशमो- तीन दिन-रात उपवास करे और शिखा सहित सिर मुँड़वाकर प्राजापत्य नामक व्रत का अनुष्ठान करे । इसके अनन्तर ब्रह्मकूर्च नामक व्रत पूरा करके ब्राह्मण को भोजन दे ॥ ६ ॥ गायत्रीं च जपेन्नित्यं दद्याद् गोमिथुनद्वयम् । विप्राय दक्षिणां दद्याच्छुद्धिमाप्नोत्यसंशयम् ॥ ७ ॥ तदनन्तर प्रतिदिन गायत्री का पाठ करे और अन्त में ब्राह्मण को दो बैल, दो गाय और दक्षिणा दान करे। इस प्रकार के अनुष्ठान से वह ब्राह्मण निश्चय ही पवित्र हो जाता है ॥ ७ ॥ गोद्वयं दक्षिणां दद्याच्छुद्धिं पाराशरोऽब्रवीत् । क्षत्रियो वाऽथ वैश्यो वा चाण्डालीं गच्छतोऽपि¹वा ॥८ ॥ महर्षि पाराशर ने शुद्धि के निमित्त दक्षिणा में दो गायों के दान का निर्देश किया है। यदि क्षत्रिय या वैश्य चाण्डाल की स्त्री से सहवास करे तो ॥ ८ ॥ प्राजापत्यद्वयं कुर्याद् दद्याद् गोमिथुनं²द्वयम् । श्वपाकीं वाऽथ चाण्डालीं शूद्रो वा यदि गच्छति ॥ ९ ॥ उसे चाहिए कि वह दो प्राजापत्य व्रत करके दो गाय और दो बैल दान में देवे । यदि शूद्र जाति का मनुष्य श्वपच या चाण्डाल की पत्नी से मैथुन करे तो ॥ ९ ॥ प्राजापत्यं चरेत् कृच्छ्रं चतुर्गोमिथुनं ददेत् । मातरं यदि गच्छेत्तु भगिनीं स्वसुतां तथा ॥१०॥ उसे चाहिए कि प्राजापत्य कृच्छ्र नामक व्रत करके चार-चार की संख्या में गाय और बैल का दान देवे। यदि कोई व्यक्ति मोहासक्त होकर अपनी माता, बहन और पुत्री से सम्भोग कर बैठे ॥ १० ॥ १ 'गच्छतो यदि' इति । २. 'गोमिथुनं तथा' इति ।