पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ३७ वह पीव और रक्त से भरे हुए अन्धतामिस्र नामक नरक में साठ हजार वर्ष तक पड़ा रहता है ॥ २ ॥ नाऽशौचं नोदकं नाऽग्निं नाऽश्रुपातं च कारयेत् । वोढारोऽग्निप्रदातारः पाशच्छेदकरास्तथा ॥ ३ ॥ इस प्रकार मरनेवाले पुरुष के लिए अशौच, जलदान तथा दाहादि कर्म न करे, उनके लिए रोवे भी नहीं । जो लोग उन्हें उठा- कर० श्मशान में दाह करते हैं, उनका बन्धन काटते हैं ॥ ३ ॥ तप्तकृच्छ्रेण शुद्ध्यन्तीत्येवमाह प्रजापतिः । गोभिर्हतं तथोद्बद्धं ब्राह्मणेन तु घातितम् ॥ ४ ॥ वे तप्तकृच्छ्र व्रत से शुद्ध होते हैं । जो गौ से मारा गया हो, फांसी लगाकर मरा हो अथवा ब्राह्मणों ने जिनको मार डाला हो ॥ ४ ॥ सम्पृशन्ति तु ये विप्रा वोढारश्चाऽग्निदाश्च ये । अन्ये ये चाऽनुगन्तारः पाशच्छेदकराश्च ये ॥ ५ ॥ उस मरे हुए को जो लोग स्पर्श करते हैं, श्मशान पर ले जाकर दाह करते हैं अथवा उसके पीछे-पीछे जाते हैं या उसकी फांसी काटते हैं ॥ ५ ॥ तप्तकृच्छ्रेण शुद्धास्ते कुर्युर्ब्राह्मणभोजनम् । अनडुत्सहितां गां च दद्युर्विप्राय दक्षिणाम् ॥ ६ ॥ वे तप्तकृच्छ्र व्रत-द्वारा शुद्ध होकर ब्राह्मण भोजन करावें और गाय, बैल के १ जोड़े दक्षिणा में दान करें ॥ ६ ॥ त्र्यहमुष्णं पिवेद् वारि त्र्यहमुष्णं पयः पिवेत् । त्र्यहमुष्णं पिवेत् सर्पिर्वायुभक्षो दिनत्रयम् ॥ ७ ॥