भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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ऽध्यायः ] · भाषाटीकासहिता ५३ हाथी, घोड़ा, भैंसा तथा ऊँट को मारने से एक दिन-रात उपवास करे और तीनों काल (प्रातः, मध्याह्न, सायं) स्नान करे तो शुद्ध होता है ॥१२॥ कुरङ्गं वानरं सिंहं चित्रं व्याघ्रं च घातयन् । शुद्धयते स त्रिरात्रेण विप्राणां तर्पणेन च ॥१३॥ हरिन, वानर, सिंह, चीता और बाघ को मारे तो तीन दिन उपवास करे और ब्राह्मणों को भोजनादि से सन्तुष्ट करे तब शुद्धि होती है ॥१३॥ मृग रोहिद् वराहाणामवेर्वस्तस्य घातकः । अफालकृष्टमश्नीयादहोरात्रमुपोष्य सः ॥१४॥ मृग, रोही, शूकर, भेड़ तथा बकरे को मारे तो एक दिन-रात उपवास करे, दूसरे दिन बिना जोते हुए ही जो अन्न उत्पन्न हो उसे खाये तब शुद्धि होती है ॥१४॥ एवं चतुष्पदानां च सर्वेषां वनचारिणाम् । अहोरात्रोषितस्तिष्ठेज्जपन् वै जातवेदसम्¹ ॥१५॥ इस प्रकार सम्पूर्ण जानवरों को अथवा जंगली चारपायों को मारे तो एक दिन-रात उपवास करे और 'ॐ जातवेदसे सुनवाम'-मन्त्र का जप करे, तो शुद्ध होता है ॥१५॥ शिल्पिनं कारुकं शूद्रं स्त्रियं वा यस्तु घातयेत् । प्राजापत्यद्वयं कृत्वा वृषैकादश दक्षिणा ॥१६॥ १. ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः । स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः ॥—ऋ० १,१९,१