भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 170 में से

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आत्महत्या से मृत स्त्री-पुरुषों के दाहादि करने में प्रायश्चित्त और तप्तकृच्छ्रादि का लक्षण है । ५. पंचम अध्याय में भेड़िया, कुत्ते और शृगाल आदि जानवरों के काटने में प्रायश्चित्त, चाण्डालादि से मारे हुए ब्राह्मणों के शरीर-स्पर्श का विचार है । ६. षष्ठ अध्याय में प्राणियों की हिंसादि तथा क्रौंचादि वध का प्रायश्चित्त है । ७. सप्तम अध्याय में द्रव्यादि शुद्धि-कथन, रजस्वला स्त्री से स्पर्श का प्रायश्चित्त है । ८. अष्टम अध्याय में गोहत्या-सम्बन्धी प्रायश्चित्त और प्राजापत्य व्रत का विधान है । ९. नवम अध्याय में ज्ञाताज्ञात अवस्था में गौ, बैल आदि के मरने पर प्रायश्चित्त तथा कृच्छ्र चान्द्रायण व्रत का विधान है । १०. दशम अध्याय में अगम्या स्त्री-गमन में चारों वर्णों के लिए प्रायश्चित्त कहा गया है । ११. एकादश अध्याय में अशुद्ध वीर्य आदि पदार्थ तथा शूद्रान्न भक्षण में प्रायश्चित्त का विवेचन है । १२. द्वादश अध्याय में दुःस्वप्न विचार, स्नान- विधि, अशक्त का वेदाध्ययन, शूद्रान्न निषेध, विष्ठा, मूत्रादि भक्षण एवं ब्रह्म- हत्यादि के प्रायश्चित्त का वर्णन है । ग्रन्थ की समाप्ति में : “एतत् पाराशरं शास्त्रं श्लोकानां शतपञ्चकम् । द्विनवत्या समायुक्तं धर्मशास्त्रस्य संग्रहः ।” (पारा०, श्लो० ७९, अ० १२) के अनुसार कहा गया है कि इसमें ५९२ श्लोक हैं । आचार तथा प्रायश्चित्त ये दो भागों में इसका विभाजन है । इसके अध्ययन से अत्यधिक पुण्य लाभ होता है, अतः प्रत्येक स्वर्गाभिलाषी व्यक्ति को चाहिए कि वह नित्य प्रति इसका पठन-पाठन करे । वस्तुतः युगधर्म के अनुसार महर्षि पाराशर ने सामयिक धर्म की व्यवस्था दी है । यथा— अस्मिन् मन्वन्तरे धर्माः कृत-त्रेतादिके युगे । सर्वे धर्माः कृते जाताः सर्वे नष्टाः कलौ युगे ॥ ( पारा०, श्लो० १६, अ० १ ) अन्ये कृतयुगे धर्मास्त्रेतायां द्वापरे युगे । अन्ये कलियुगे नृणां युगरूपानुसारतः ॥ ( पारा०, श्लो० २२, अ० १ )

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