पारस्कर गृह्यसूत्र (मार्गदर्शिनी टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

पारस्कर गृह्यसूत्र (मार्गदर्शिनी टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Paraskara Grihyasutra Hindi
महर्षि पारस्कर (टीकाकार: कुलमणि मिश्र शर्मा) द्वारा
स्रोत: Paraskara Grihyasutram with Margadarshini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished263 पृष्ठ
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( XIV )
| मन्त्रा: | का.क.सू. | पृष्ठाङ्का: | मन्त्रा: | का.क.सू. | पृष्ठाङ्का: |
|---|---|---|---|---|---|
| आलिखन्ननिमिषः | १।६।१९ | ६४ | गन्धर्व प्रायश्चित्ते त्वं | १।१।१२ | ४६ |
| इडासि मैत्रावरुणी | १।६।१५ | ६२ | गृह्णामि ते सौभग | १।६।२ | ३१ |
| इन्द्र श्रेष्ठानि | १।८।६ | ६९ | गोपायमानं च मा | ३।४।१६ | १७१ |
| इन्द्रस्य त्वा वज्रेण | ३।५।३ | २१० | ग्रीष्मो हेमन्त उत | ३।२।२ | १४७ |
| इमामग्निखायतां | १।५।११ | २८ | चक्षुभ्यांथं श्रोत्रा | ३।६।२ | १७४ |
| इमामुच्छ्रयामि | ३।४।४ | १६४ | चन्द्र प्रायश्चित्ते | १।१।१२ | ४६ |
| इमांल्लाजानावपा | १।६।२ | ३० | चित्तं च चित्तिश्चा | १।५।९ | २६ |
| इयमोषधी त्राय | १।१३।१ | ५२ | जरां गच्छ परिवत्स्व | १।४।१३ | २० |
| इयं दुरुक्तं परि | २।२।११ | ८२ | ज्योतिष्मती प्रतिमुञ्च | ३।३।५ | १५४ |
| इयं नायु॑पत्नॄते | १।६।२ | ३० | तत् सत्यं यत्ते देवा | १।६।२० | ६५ |
| इह गावो निषीद | १।८।१० | ३८ | तत् सत्यं यत्ते सरमा | ,, | ६५ |
| उदायुषा स्वायुषो | ३।२।१४ | १५२ | तनूपा अग्नेऽसि | २।४।८ | ९२ |
| उद्यन् भ्राजभृष्णु | २।६।११ | १०२ | तां ते वाचमास्य | ३।९।३६ | २०६ |
| उभा कवी युवा | २।११।१२ | १२३ | तुभ्यमग्ने पर्य | १।७।३ | ३४ |
| उष्णेन वाय उद | २।१।६ | ७५ | तेन मामभिषिञ्चा | २।६।९ | १०१ |
| ऊनं मे पूर्यतां | २।१६।३ | १३५ | त्रिंशत् स्वसार उप | ३।३।५ | १५४ |
| ऊर्क च त्वा सूनृ | ३।४।१४ | १७१ | त्वाष्ट्रोऽसि त्वष्टृ | ३।५।५ | २११ |
| ऋतं प्रपद्ये | ३।४।६ | १६६ | दीदिविश्व मा जागु | ३।४।१७ | १७१ |
| ऋतस्य गर्भः प्रथमा | ३।३।५ | १५५ | देवीं वाचमजनयन्त | १।१९।२ | ७० |
| ऋतूनां पत्नी प्रथमेय | ३।३।५ | १५५ | द्यौस्त्वा ददातु | ३।५।२२ | २१५ |
| एकमिषे द्वे ऊर्जे | १।८।१ | ३५ | धर्मस्थूणा राजथं | ३।४।१९ | १७२ |
| एकाष्टका तपसा | ३।३।५ | १५४ | धातारं च विधाता | ३।४।९ | १६९ |
| एतमुत्यं मधुना | ३।१।६ | १४६ | ध्रुवमसि ध्रुवं | १।८.१९ | ४० |
| एतं युवानं पतिं | ३।९।६ | १८३ | ध्रुवाय भौमाय | २।१४।८ | १२८ |
| एष वा माश्वेना | ३।१४।१३ | २०९ | नमः श्यावा | १।३।१९ | १३ |
| कर्त्तारं च विकर्त्तारं | ३।४।९ | १६९ | तमः स्त्रियै | १।१२।४ | ५१ |
| कामाभिद्रुग्धो | ३।१२.९ | २०३ | न नामयति न | १।१६।१२ | ६६ |
| कामावर्कार्योऽस्म्य | ३।१२।९ | २०३ | नमो रुद्राय गिरि | ३।५।१३ | २१२ |
| कुर्कुरः सुकुर्कुरः | १।१६।२० | ६५ | नमो रुद्राय चतु | ३।५।१८ | २१२ |
| केता च मा सुकेता | ३।४।१५ | १७१ | नमो रुद्राय पथि | ३।५।१७ | २११ |
| क्षेमस्य पत्नी बृहती | ३।४।४ | १६४ | नमो रुद्राय पितृ | ३।५।१४ | २१२ |