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पारस्कर गृह्यसूत्र (मार्गदर्शिनी टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Paraskara Grihyasutra Hindi
महर्षि पारस्कर (टीकाकार: कुलमणि मिश्र शर्मा) द्वारा
स्रोत: Paraskara Grihyasutram with Margadarshini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished263 पृष्ठ
पृष्ठ 257स्थायी लिंक
( XV )
| मन्त्राः | का.क.सू. | पृष्ठाङ्काः | मन्त्राः | का.क.सू. | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|
| नमो रुद्राय वन | ३।५।१२ | २१२ | ममव्रते ते | १।८।८ | ८५ |
| नमो रुद्राय शकृत् | ३।५।१५ | २१३ | यज्ञश्च त्वा दक्षिणा | ३।४।१२ | १७० |
| नमो रुद्रायाप्सु | ३।५।९ | २१२ | यत्ते सुसीमे | १।११।९ | ४९ |
| नवै श्वेतस्या | २।१४।४ | १२७ | यत् खुरेण | २।१।१७ | ७८ |
| पञ्च व्युष्टीरनु | ३।३।५ | १५५ | यदेषि मनसा | १।४।१६ | २३ |
| परि त्वा गिरेरहं | ३।७।२ | १७६ | यदद्यशोप्परसा | २।६।१० | १०५ |
| परि त्वा ह्लनो | ३।७।३ | १७६ | यन्मधुनो | १।३।२१ | १४ |
| परिधास्यै यशो | २।६।१५ | १०४ | यन्मेकिञ्चिदस्त्यु | ३।४।१९ | १७२ |
| पुमाꣳसौ मित्रा | १।९।६ | ४३ | यन्मेकिञ्चिदुपे | २।१७।९ | १३८ |
| पुरस्ताद् ये | २।१७।१४ | १४० | यशसा मा द्यावा | २।३।१६ | १०५ |
| पूर्वाह्निमपराह्ण | ३।४।९ | १६८ | यस्यांभूतं | १।७।२ | ३३ |
| पूषा गा अन्वेतु | ३।९।५ | १८२ | यस्याभावे | २।१७।९ | १३८ |
| पृथिवी द्यौः प्रदि | २।१७।९ | १३७ | यां जनाः | ३।२।२ | १४७ |
| प्रजापतये त्वा परि | २।२।२ | ८६ | या अकृन्तन्नव | १।४।१४ | २१ |
| प्रजापतेष्ट्वा हिंकारे | १।१८।३ | ६८ | या आहरज्जम | २।६।१८ | १०५ |
| प्रजापतिर्य्या | १।५।९ | २६ | या त एषा रराख्या | ३।१३।५ | २०५ |
| प्रतिष्ठे स्थो विश्व | २।६।२१ | १०७ | या ते पतिघ्नी | १।११।१४ | ४७ |
| प्रतीकं मे विच | ३।१६।२ | २१७ | या प्रथमा व्यौ | ३।३।५ | १५५ |
| प्राणापानौ मे तर्प | २।६।१३ | १०३ | यास्ते पुरस्तात् | ३।८।९ | १७९ |
| प्राणेनान्नमशीय | १।१२।३ | ७१ | यास्ते रुद्र दक्षि | ३।८।९ | १७९ |
| प्राणैस्ते प्राणान् | १।११।१५ | ४८ | यास्ते रुद्र पश्चा | " | " |
| बृहस्पतेश्छर्दि | २।६।२४ | १०६ | यास्ते रुद्राध | " | " |
| ब्रह्मन् प्रत्यव | ३।२।११ | १५१ | यास्ते रुद्रो | " | " |
| ब्रह्मा त्वा पिवतु | ३।५।२५ | २१६ | यास्ते रुद्रोपरिष्टात् | ३।८।१० | १७० |
| ब्रह्मात्वाश्नातु | ३।५।२४ | २१६ | युवा सुवासाः परि | २।२।१२ | ८२ |
| ब्रह्मा त्वा प्रा | ३।५।२५ | २१६ | ये अप्सवन्तरग्नयः | २।६।१९ | १०१ |
| भद्रान्नः | ३।१।४ | १४५ | ये चत्वारः पथयो | ३।१।२ | १४३ |
| भीमा वायुसमा | ३।१०।१७ | १४१ | येन भूरिश्वरा | २।१।१६ | ७७ |
| माता रुद्राणां | १।३।२८ | १६ | येन श्रियमकृणो | २।६।१० | १०२ |
| मा त्वाशनिमपिरशु | ३।५।२१ | २१४ | येनावपत्सविता | २।१।१२ | ७६ |
| ममव्रते ते | १।८।८ | ३७ | येनेन्द्राय बृह | २।२।१० | ८१ |
पृष्ठ 258स्थायी लिंक
( XVI )
| मन्त्राः | का.क.सू. | पृष्ठाङ्काः | मन्त्राः | का.क.सू. | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|
| यो मे दण्डः | २।२।१४ | ८४ | समञ्जन्तु विश्वे | १।४।१५ | २१ |
| वष्मोऽस्मि समा | १।३।९ | १० | समुद्रं वः | १।३।१५ | १२ |
| वायो प्रायश्चित्ते | १।११।२ | ४६ | सम्पत्तिर्भूति | २।७।९ | १३८ |
| वास्तोष्पते प्रतर | ३।४।८ | १६६ | सम्मासिञ्चन्तु | ३।१२।१० | २०३ |
| वास्तोष्पते प्रति | ,, | ,, | सरस्वतिप्रेद | १।७।२ | ३३ |
| वास्तोष्पते शग्मया | ,, | ,, | सर्पदेवजना | ३।४।९ | १६८ |
| विराजो दोहोसि | १।३।१३ | १३ | सवित्रा प्रसूता | २।९।९ | ७५ |
| विश्वाभ्यो मा ना | २।६।२६ | १०७ | सहनोऽस्तु सह | २।१०।२२ | ११९ |
| विश्वे आदित्या | ३।३।६ | १४९ | सा नः पूषा शिव | १।४।१७ | २३ |
| वेद ते भूमि | १।१६।१३ | ६१ | सिगसि न वभ्रो | ३।१५।१७ | २१३ |
| शण्डा मर्का उप | १।१६।१९ | ६४ | सुगं न पन्थां | १।५।११ | २९ |
| शतायुधाय शत | ३।१।२ | २४३ | सुचक्षा अहम | २।६।१४ | १०४ |
| शान्ता पृथिवी शिव | ३।३।६ | १४९ | सुमङ्गलीरियं | १।८।९ | ३८ |
| शिवा नो वर्षाः | ३।१५।१८ | २१३ | सुहेमन्तः सुवस | ३ २।१ | १५१ |
| शुक्र ऋषभा नभसा | ३।३।५ | १४५ | सूर्य प्रायश्चित्ते | १।११।१ | ४६ |
| शूद्रोसि शूद्रा | ३।१५।६ | २११ | सोम एव नो राजे | १।५।८ | ५६ |
| श्रीश्च त्वा यशश्च | ३।४।१२ | १७० | सोमो ददद् गन्ध | १।४।१७ | २३ |
| श्वेतवायवान्त | २।१४।७ | १२८ | सोमः प्रथमो विवि | ,, | ,, |
| ,, | २।१४।९ | १२९ | स्योनथं शिवमिदं | ३।४।९ | १६९ |
| ,, | २।१४।१० | १२९ | स्यो ना पृथिवी | ३।२।१४ | १५२ |
| ,, | २।१४।९ | १३० | स्वस्ति नो अग्ने | १।५।११ | २९ |
| संवत्सरायं | ३।२ २ | १४७ | स्विष्टमग्ने अभि | ३।२।३ | १४४ |
| संवत्सरस्य | ,, | ,, | हस्तियश | ३।१५।२ | २१० |
| सभाङ्गिर | ३।१३।२ | २०४ | हिरण्यपर्णा | ३।१५।२० | २१४ |
| सभा च मा समि | ३।१२।३ | २०४ |
—४०४—
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Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu
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२
वाल्मीकिविद्यापीठपुस्तकालयः
प्रत्यावर्तनतिथिः
| ०४९/९/२८ | ||
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98066
पृष्ठ 262स्थायी लिंक
[सीलबंद चिह्न/लोगो]:
महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय
MAHENDRA SANSKRIT UNIVERSITY 1986 AD
महेन्द्र संस्कृत विश्वविद्यालय
वाल्मीकि विद्यापीठ
पुस्तकालय
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Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu