परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)
Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary
महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा
समर्पणम् वेदबाणाङ्कवसुधा (१९५४) वैक्रमेऽब्दे गुरोर्दिने । भाद्रे भूततिथौ भूतिः सिते सम्पूर्णतामगात् ॥ १ ॥ माता श्री गोपिकाख्या स्म भवति जनकः श्रीमहादेवशर्मा पूज्यः श्रीबालशास्त्री विबुधनृपनुतोऽभूद् गुरुर्यस्य मुख्यः । तात्येत्याख्या द्वितीया सकलजनमता यज्जनेः काशिकायां सोऽयं श्रीरामकृष्णो गुरुजनदयया पूजितोऽभूद् बुधेषु ॥ २ ॥ भूतिं यां पटवर्धनेति कुलजाख्यो दाक्षिणात्यो द्विजः सम्पाद्यैव मुदे सदा चरणयोः शम्भोरिमामार्पयत् । तामेनां स्वमुखे दधाति हृदि वा प्रीत्या प्रसादेव य- स्तस्य स्यात्तु विवादिभूतजनिता बाधा कदाऽपीह न ॥ ३ ॥ —म० म० श्रीतात्याशास्त्री
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चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन वाराणसी