पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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( १५७ )
| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| प्रत्ययस्य परचित्तज्ञानम् | ३ | १९ | ९८ |
| प्रमाणविपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः | १ | ६ | ३ |
| प्रयत्नशैथिल्यानन्तसमापत्तिभ्याम् | २ | ४७ | ७६ |
| प्रवृत्तिभेदे प्रयोजकं चित्तमेकमनेकेषाम् | ४ | ५ | १२९ |
| प्रवृत्त्यालोकन्यासात्सूक्ष्मव्यवहितविप्रकृष्टज्ञानम् | ३ | २५ | १०२ |
| प्रसंख्यानेऽप्यकुसीदस्य सर्वथा विवेकख्यातेर्धर्ममेघः समाधिः | ४ | २९ | १४६ |
| प्रातिभाद्वा सर्वम् | ३ | ३३ | १०५ |
[ ब ]
| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| बन्धकारणशैथिल्यात्प्रचारसंवेदनाच्च चित्तस्य परशरीरावेशः | ३ | ३८ | १०८ |
| ब्रह्मचर्यप्रतिष्ठायां वीर्यलाभः | २ | ३८ | ७२ |
| बलेषु हस्तिबलादीनि | ३ | २४ | १०१ |
| बहिरकल्पिता वृत्तिर्महाविदेहा ततः प्रकाशावरणक्षयः | ३ | ४३ | ११२ |
| बाह्याभ्यन्तरस्तम्भवृत्तिर्देशकालसंख्याभिः परिदृष्टो दीर्घसूक्ष्मः | २ | ५० | ७८ |
| बाह्याभ्यन्तरविषयाक्षेपी चतुर्थः | २ | ५१ | ८० |
[ भ ]
| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| भवप्रत्ययो विदेहप्रकृतिलयानाम् | १ | १९ | १५ |
| भुवनज्ञानं सूर्ये संयमात् | ३ | २६ | १०२ |
[ म ]
| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| मूर्धज्योतिषि सिद्धदर्शनम् | ३ | ३२ | १०४ |
| मृदुमध्याधिमात्रत्वात्ततोऽपि विशेषः | १ | २२ | १८ |
| मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम् | १ | ३३ | २७ |
| मैत्र्यादिषु बलानि | ३ | २३ | १०१ |
[ य ]
| पाद | सूत्र | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|
| यथाभिमतध्यानाद्वा | १ | ३९ | ३० |