संग्रह पर लौटें




पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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[ ३ ]
| The Philosophy of Love 1-0-0 | The Divine Name and Its Practice 0-3-0 |
| Gems of Truth (Second Series) | The Immanence of God 0-2-0 |
| (Bound) 0-12-0 | What is God? 0-2-0 |
| The Bhagavadgita 0-4-0 | Wavelets of Bliss 0-2-0 |
| Bound 0-6-0 | What is Dharma? 0-0-9 |
| The Divine Message 0-0-9 |
नयी सूचना
छोटी-छोटी पुस्तकोंके बंद लिफाफोंमें पैकेट बनाये गये हैं। इन पैकेटोंपर पुस्तकोंके अलग-अलग नाम तथा मूल्य छाप दिया गया है। पैकेटोंमें हेर-फेर नहीं किया जाता है। किसी भी पुस्तककी अधिक संख्यामें अलग माँग दी जा सकती है।
पैकेटोंका विवरण इस प्रकार है—
पैकेट नं० १, पुस्तक-संख्या १३, मूल्य ॥।)
| १—सामयिक चेतावनी —) | ९—श्रीमद्भगवद्गीताका तात्त्विक विवेचन —) |
| २—आनन्दकी लहरें —) | १०—भगवत्तत्त्व —) |
| ३—गोविन्द-दामोदर-स्तोत्र —) | ११—सन्ध्योपासनविधि अर्थ-सहित —) |
| ४—श्रीप्रेमभक्तिप्रकाश —) | १२—हरेरामभजन दो माला )॥ |
| ५—ब्रह्मचर्य —) | १३—पातञ्जलयोगदर्शन मूल )। |
| ६—सप्त महाव्रत —) | ----------------------------- |
| ७—सच्चा सुख और उसकी प्राप्ति —) | ॥।) |
| ८—भगवन्नाम —) |
पैकेट नं० २, पुस्तक-सं० ५, मूल्य ।)
| १—संत-महिमा )॥ | ४—वैराग्य )॥ |
| २—श्रीरामगीता )॥ | ५—रामायण सुन्दरकाण्ड —) |
| ३—विष्णुसहनाम मूल )॥ | ----------------------------- |
| ।) |
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[ ४ ]
पैकेट नं० ३, पुस्तक-संख्या १६, मूल्य ॥)
| १—विनय-पत्रिकाके पंद्रह पद (सार्थ) )॥ | १०—भगवत्प्राप्तिके विविध उपाय )॥ |
| २—सीतारामभजन )॥ | ११—व्यापारसुधारकी आवश्यकता और व्यापारसे मुक्ति )॥ |
| ३—भगवान् क्या हैं ? )॥ | १२—स्त्रियोंके कल्याणके कुछ घरेलू प्रयोग )॥ |
| ४—भगवान्की दया )॥ | १३—परलोक और पुनर्जन्म )॥ |
| ५—गीतोक्त सांख्ययोग और निष्कामकर्मयोग )॥ | १४—ज्ञानयोगके अनुसार विविध साधन )॥ |
| ६—सेवाके मन्त्र )॥ | १५—अवतारका सिद्धान्त )॥ |
| ७—प्रश्नोत्तरी )॥ | १६—गीताके श्लोकोंकी वर्णानुक्रम-सूची )॥ |
| ८—सन्ध्या विधिसहित )॥ | |
| ९—सत्यकी शरणसे मुक्ति )॥ | <u> </u><br> ॥) |
पैकेट नं० ४, पुस्तक-सं० १८, मूल्य ।)
| १—धर्म क्या है ? )। | १०—शोक-नाशके उपाय )। |
| २—श्रीहरिसंकीर्तन-धुन )। | ११—ईश्वर साक्षात्कारके लिये नाम-जप सर्वोपरि साधन है )। |
| ३—दिव्य सन्देश )। | १२—चेतावनी )। |
| ४—नारद-भक्ति-सूत्र )। | १३—त्यागसे भगवत्-प्राप्ति )। |
| ५—महात्मा किसे कहते हैं ? )। | १४—श्रीमद्भगवद्गीताका प्रभाव )। |
| ६—ईश्वर दयालु और न्यायकारी है )। | १५—लोभमें पाप आधा पैसा |
| ७—प्रेमका सच्चा स्वरूप )। | १६—सप्तश्लोकी गीता आधा पैसा |
| ८—हमारा कर्तव्य )। | १७-१८—गजल गीता २ प्रति )। |
| ९—कल्याणप्राप्तिकी कई युक्तियाँ )। | <u> </u><br> ।) |
पता—गीताप्रेस, पो० गीताप्रेस (गोरखपुर)
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६:
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महा... प्रतिज्ञा उत्तर-पत्री
(गो-दर्शन)
... कठिन ... व ... इत्यादि ।
... विषय ... इत्यादि । यथा
१ २ ३ पृष्ठाः ५, ७, १२,
४, ५, ६, ७, ८ पृष्ठाः
... ९, १०, ११, १२ पृष्ठाः
... गानं स्व... मन्त्रहीनं कुर्यात् ।
...
...
...
...
...
...
...
...
... भोज
... - घनश्यामदास ..., गीता प्रेस, गोरखपुर ।